वॉशिंगटन | अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच व्हाइट हाउस ने रविवार को कुछ अहम तस्वीरें जारी की हैं। इनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और वरिष्ठ सलाहकार व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में दिखाई दे रहे हैं, जहां वे ईरान पर किए गए हवाई हमलों की लाइव निगरानी कर रहे थे। बताया गया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों—फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान—पर सटीक हमले किए। ये तस्वीरें ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद सार्वजनिक की गईं और इसके साथ राष्ट्रपति ट्रंप का राष्ट्र को संबोधन भी हुआ।
इजरायल के अभियान में अमेरिका की खुली एंट्री
ट्रंप ने खुद तय की गई दो हफ्ते की समयसीमा से पहले ही बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान में अमेरिका की सीधी भागीदारी की पुष्टि कर दी। यह फैसला उस समय आया जब इजरायल और ईरान के बीच पिछले कई दिनों से लगातार संघर्ष जारी है। इजरायल जहां ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने की बात कर रहा है, वहीं ईरान बार-बार अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण बता रहा है।
अमेरिकी हमले: परमाणु ठिकानों को सीधे निशाना
अमेरिका के रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में अत्याधुनिक बी-2 बमवर्षक विमानों और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार:
- 6 बंकर-बस्टर बम फोर्डो परमाणु संयंत्र पर गिराए गए।
- 30 टॉमहॉक मिसाइलों से अन्य प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया गया।
यह हमला अमेरिका की उस सैन्य शक्ति को दर्शाता है जो किसी भी देश के संवेदनशील बुनियादी ढांचे को कुछ ही समय में ध्वस्त करने में सक्षम है।
ट्रंप की चेतावनी: “शांति या तबाही, फैसला ईरान का”
राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी: “ईरान को तय करना होगा—वह शांति चाहता है या त्रासदी। अगर उसने कदम पीछे नहीं खींचे, तो आगे और भी हमले होंगे।” हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका शासन परिवर्तन नहीं चाहता और अभी और हमलों की योजना नहीं है—संकेत है कि तनाव कम करने की भी गुंजाइश बाकी है।
नेतन्याहू का समर्थन, अमेरिका में बंटा रुख
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले को साहसी और निर्णायक बताया। वहीं, अमेरिकी राजनीति में इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं:
- कुछ सांसदों ने कदम का समर्थन किया।
- वहीं, कई डेमोक्रेट और रिपब्लिकन नेताओं ने संसदीय स्वीकृति के बिना सैन्य कार्रवाई को असंवैधानिक बताया।
क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई मध्य पूर्व में संघर्ष को और गहरा कर सकती है। ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की संभावना को नकारा नहीं जा सकता, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय युद्ध का खतरा और बढ़ सकता है।
सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस सैन्य दबाव का जवाब कैसे देता है—कूटनीतिक रास्ता चुनेगा या सीधी टकराव की राह पर जाएगा।