तेहरान | इस्लामिक गणराज्य ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक तीखा बयान जारी करते हुए दावा किया है कि उसका कार्यक्रम पूरी तरह से सुरक्षित और सक्रिय है। ईरानी सेना की ओर से एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर की गई पोस्ट में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी निशाना साधा गया और उन्हें ‘पिगमैन’ कहकर संबोधित करते हुए झूठे बयानों का दोषी ठहराया गया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हवाई हमलों के दावे किए गए हैं और ट्रंप ने ईरान को ‘शांति या विनाश’ में से एक विकल्प चुनने की चेतावनी दी थी। ईरान ने इन हमलों के प्रभाव को सिरे से नकारते हुए कहा कि उसके परमाणु ठिकानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
ईरान का इशारा- कोई दबाव नहीं झुकाएगा
तेहरान का कहना है कि पश्चिमी देशों द्वारा उसके परमाणु कार्यक्रम को बाधित करने के सभी प्रयास विफल रहे हैं। यह बयान अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद ईरान की दृढ़ता को दर्शाता है कि वह अपने परमाणु एजेंडे से पीछे नहीं हटेगा। विश्लेषकों के मुताबिक, बयान का लहजा आक्रामक है और यह मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
ट्रंप पर फिर हमला
ईरानी सेना की ओर से जारी बयान में जिस अंदाज़ में ‘पिगमैन’ शब्द का प्रयोग हुआ है, उसे साफ तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के लिए अपमानजनक संकेत माना जा रहा है। ईरान पहले भी अमेरिकी नेताओं पर गलत सूचनाएं फैलाने और दुष्प्रचार करने के आरोप लगा चुका है। अब इस तरह के सीधे हमले से यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान कूटनीतिक नरमी की बजाय प्रतिरोध की नीति पर कायम है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर नया संकट
यह ताज़ा बयान ऐसे समय में सामने आया है जब इजराइल और अमेरिका दोनों ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा बताते हुए उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं। इजराइल ने हाल ही में दावा किया था कि उसके हमलों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम काफी पीछे चला गया है, जबकि ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
ईरान के इस रुख से यह स्पष्ट है कि वह न केवल अपने परमाणु अधिकारों की रक्षा के लिए तैयार है, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ कड़ा प्रतिरोध भी दर्ज कराना चाहता है। आने वाले दिनों में यह मसला मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है।