नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु स्थलों पर हवाई हमले के बाद पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अब ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला और भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारत के व्यापार के लिए बड़ा खतरा
भारत का ईरान, इराक, इज़राइल, लेबनान, जॉर्डन, सीरिया और यमन जैसे देशों के साथ सालाना $41.8 अरब (करीब ₹3.55 लाख करोड़) का व्यापार होता है। यदि इस क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनी रहती है, तो समुद्री मार्गों, बंदरगाह संचालन और भुगतान प्रणाली में रुकावट आ सकती है, जिससे भारत का आयात-निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में शिपिंग बीमा, माल ढुलाई दरें और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी वृद्धि होगी, जो भारतीय उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का खतरा बढ़ा सकती है।
होर्मुज और रेड सी का भारत के लिए महत्व
- भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का दो-तिहाई हिस्सा और आधे से ज्यादा एलएनजी (LNG) आयात इसी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते करता है।
- वहीं, रेड सी का बाब-एल-मंडेब मार्ग भारत के लगभग 30% निर्यात को यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और अमेरिका तक पहुँचाने का रास्ता है।
अगर इन मार्गों में अवरोध आता है तो ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता सीधे प्रभावित होगी।
बढ़ती तेल कीमतें और महंगाई का असर
तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, हर $10 प्रति बैरल की वृद्धि से भारत की खुदरा महंगाई (CPI) में करीब 35 बेसिस पॉइंट तक का इजाफा हो सकता है। इससे ईंधन, परिवहन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ेगा।
वैकल्पिक रणनीतियों पर काम कर रही भारत सरकार
बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार वैकल्पिक समुद्री मार्गों और आपूर्ति विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना और यूरोप-अमेरिका के लिए पूर्वी समुद्री मार्गों का इस्तेमाल शामिल है।
भारत की रणनीतिक दुविधा
भारत की ईरान से लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक साझेदारी रही है। वहीं इज़राइल, अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ भी भारत के मजबूत रणनीतिक रिश्ते हैं। यह संतुलन बनाए रखना भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती बन सकता है, क्योंकि इन सभी देशों की भूमिका इस संघर्ष में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ी हुई है।
भारत के लिए चाबहार बंदरगाह भी बेहद अहम है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच का रणनीतिक द्वार माना जाता है।
वैश्विक संकट की चेतावनी
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के निदेशक अजय श्रीवास्तव ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को लंबी अवधि तक बंद किया जाता है, तो यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सैन्य और आर्थिक संकट बन सकता है।