नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया गया है। एजेंसी ने इस फैसले के पीछे सामान्य मानसून, कच्चे तेल की नरम कीमतें और मौद्रिक नीति में ढील को प्रमुख कारक बताया है।
एसएंडपी ने यह भी आगाह किया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, जिससे तेल की कीमतों में उछाल और नेट ऊर्जा आयातक देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में लागत और मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
फिलहाल तेल बाज़ार में संतुलन, दीर्घकालिक प्रभाव की संभावना नहीं
एसएंडपी का मानना है कि फिलहाल वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संतुलित है, जिससे दीर्घकालिक प्रभाव की संभावना कम है। एजेंसी ने कहा, “तेल की मौजूदा आपूर्ति को देखते हुए यह संभावना नहीं है कि कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी।”
पिछले महीने एसएंडपी ने वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों के चलते भारत की वृद्धि दर का अनुमान 6.3 प्रतिशत कर दिया था। लेकिन अब स्थितियों में सुधार देखते हुए 2025-26 के लिए इसे फिर से संशोधित कर 6.5 प्रतिशत कर दिया गया है।
एशिया-प्रशांत के लिए जारी किया आर्थिक परिदृश्य
मंगलवार को जारी रिपोर्ट में एसएंडपी ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए आर्थिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। रिपोर्ट में कहा गया है, “हम उम्मीद करते हैं कि भारत की जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 में 6.5 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रहेगी।”