नई दिल्ली | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने संविधान की प्रस्तावना में शामिल ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों पर पुनर्विचार की मांग की है। संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि ये शब्द आपातकाल के दौरान जोड़े गए थे और ये बीआर आंबेडकर द्वारा निर्मित मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे।
‘आपातकाल में जोड़े गए थे ये शब्द’
होसबाले ने कहा, “बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान की प्रस्तावना में ये शब्द नहीं थे। जब आपातकाल लगाया गया, मौलिक अधिकार निलंबित हुए, संसद और न्यायपालिका पंगु हो गई थी—तब इन्हें जोड़ा गया।” उन्होंने कहा कि आज तक इन शब्दों को हटाने पर कोई गंभीर चर्चा नहीं हुई, जबकि इस पर विचार किया जाना चाहिए कि क्या इन्हें प्रस्तावना में बनाए रखना उचित है।
क्या समाजवाद भारत के लिए शाश्वत विचारधारा है?
संघ महासचिव ने सवाल उठाया, “क्या समाजवाद का विचार भारत के लिए स्थायी वैचारिक ढांचा हो सकता है? क्या इसे प्रस्तावना में अनिवार्य रूप से बनाए रखा जाना चाहिए?” उन्होंने कहा कि इस पर खुले विचार-विमर्श की जरूरत है।
कांग्रेस पर कसा तंज, माफी की मांग
कार्यक्रम में आपातकाल को याद करते हुए होसबाले ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला और कहा कि जिन्होंने उस दौर में जनतंत्र का गला घोंटा, वे आज संविधान की प्रति लेकर नैतिकता की बात कर रहे हैं, जबकि अब तक उन्होंने माफी तक नहीं मांगी। उन्होंने कहा, “जिन्होंने मीडिया, न्यायपालिका और आम लोगों की आज़ादी को कुचला, वे आज संविधान की दुहाई दे रहे हैं। उन्हें देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।”
नितिन गडकरी का हमला: इंदिरा गांधी ने कुर्सी बचाने के लिए संविधान कुचला
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा, “25 जून 1975 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए आपातकाल लगाया और देश की आवाज को दबा दिया।” उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान में एकतरफा संशोधन किए गए और उसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की गई।
गडकरी ने आगे कहा, “कांग्रेस हम पर आरोप लगाती है कि हम संविधान बदलना चाहते हैं, जबकि हमने कभी ऐसा नहीं कहा और न ही हमारी मंशा है। संविधान के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ अगर किसी ने किया है, तो वह इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार थी।”