डोडोमा/किलिमंजारो | तंजानिया के किलिमंजारो क्षेत्र में शनिवार रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें दो यात्री बसों की आमने-सामने टक्कर के बाद कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई और 30 से ज्यादा यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा मोशी-तांगा हाइवे के सबासाबा इलाके में हुआ और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
आग में झुलसे यात्री, लोगों ने तोड़ा कांच और बचाई जान
हादसे के बाद दोनों बसों में आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कई यात्री बसों में फंस गए और बाहर निकलने की कोशिश करते रहे। लोगों ने साहस दिखाते हुए कांच तोड़े और यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की, लेकिन कुछ को नहीं बचाया जा सका।
एक चश्मदीद ने बताया, “लपटों में घिरी बसों से यात्रियों की चीखें दिल दहला देने वाली थीं। हमने ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा।”
गंभीर रूप से झुलसे कई घायल, शवों की पहचान मुश्किल
रेस्क्यू टीम और स्थानीय आपात सेवाओं ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया। कई शव आग में जलकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। अधिकतर मृतक तंजानिया के स्थानीय नागरिक बताए जा रहे हैं।
शादी समारोह में जा रहे थे यात्री
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे में शामिल एक बस शादी समारोह के लिए यात्रियों को लेकर जा रही थी। उत्सव की यात्रा कुछ ही क्षणों में मातम में बदल गई।
हादसे की जांच शुरू, टायर फटने की आशंका
पुलिस और यातायात अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्टों में एक बस का टायर फटने के कारण चालक के नियंत्रण खो देने और सामने से आ रही बस से टक्कर की आशंका जताई गई है। मौके से मिली तस्वीरें हादसे की भयावहता को बयां करती हैं—झुलसी बसें, बिखरे मलबे और क्षतिग्रस्त ढांचे।
राष्ट्रपति हसन ने जताया शोक
तंजानिया की राष्ट्रपति सामिया सुलुहु हसन ने इस भीषण हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “इस त्रासदी में जान गंवाने वालों के परिजनों और दोस्तों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। ईश्वर मृतकों को शांति और घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करें।”
यह हादसा क्यों चिंता का विषय है?
इस घटना ने एक बार फिर अफ्रीकी देशों में सड़क सुरक्षा, ढीले यातायात नियमों और सार्वजनिक परिवहन की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सड़कों की हालत बेहतर और वाहनों की नियमित जांच होती, तो इस तरह की त्रासदी से बचा जा सकता था।