पटना | भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (भाकपा-माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बिहार में मतदाता सूची अद्यतन प्रक्रिया को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी-नीतीश सरकार, अपनी संभावित चुनावी हार से बौखलाकर अब चुनाव आयोग के माध्यम से गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्गों के वोटिंग अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है।
भट्टाचार्य ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि “यह प्रक्रिया ‘वोटबंदी’ की तरह है, जैसे 2016 की नोटबंदी – जो गरीबों को ही सबसे अधिक प्रभावित करने वाली थी।” उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा बिहार की मतदाता सूची को एक महीने में अपडेट करने के आदेश के तहत नागरिकता संबंधी दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो राज्य के बड़ी संख्या में गरीब, खेतिहर मजदूर, प्रवासी और वंचित तबके के लोगों के पास नहीं हैं।
‘मताधिकार पर सीधा हमला’
भाकपा-माले महासचिव ने कहा कि जुलाई का महीना खेती-किसानी और प्रवास का समय होता है। इस दौरान दस्तावेजों की मांग और सूची अपडेट की प्रक्रिया, लाखों लोगों को मतदाता सूची से बाहर कर सकती है। उन्होंने इसे “संविधान प्रदत्त सार्वभौमिक मताधिकार पर हमला और लोकतंत्र की हत्या” करार दिया।
राज्यव्यापी विरोध की घोषणा
दीपांकर भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से आह्वान किया है कि वे 1 जुलाई से पूरे राज्य में इस आदेश के खिलाफ व्यापक जनअभियान चलाएं। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में जनसभाएं, विरोध प्रदर्शन और जनांदोलन आयोजित कर जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
भट्टाचार्य ने कहा, “बिहार के मेहनतकश नागरिकों ने लंबी लड़ाई लड़कर जो मताधिकार हासिल किया है, उसे किसी भी कीमत पर छीना नहीं जाने दिया जाएगा।”