2 July,2025
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर सबसे जरूरी चीज़ को नजरअंदाज कर देते हैं – परिवार। टेक्नोलॉजी ने जहाँ हमारी दुनिया को जोड़ा है, वहीं दिलों के बीच दूरियाँ भी बढ़ा दी हैं। घर में सब साथ होते हुए भी अगर हर कोई अपने मोबाइल में व्यस्त है, तो वह साथ कैसा?
परिवार विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार के साथ बिताया गया समय बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन अफसोस, अब “परिवार साथ बैठा है” का मतलब है — सबका ध्यान मोबाइल स्क्रीन पर।
क्यों जरूरी है साथ में ‘वक़्त बिताना’?
- जब हम बिना किसी डिजिटल डिवाइस के साथ बैठते हैं, तो असली बातचीत होती है।
- बच्चों को लगता है कि उनके माता-पिता उन्हें सुनते और समझते हैं।
- बुजुर्गों को अपनापन महसूस होता है।
- और रिश्तों में नई ऊर्जा आती है।
क्या कर सकते हैं आप?
- रात के खाने का समय ‘नो मोबाइल’ घोषित करें।
- हफ्ते में एक दिन परिवार के साथ गेम्स, फ़िल्म या सिर्फ गप्पें मारने का तय करें।
- बच्चों को सिखाएं कि असली कनेक्शन वाई-फ़ाई से नहीं, दिल से होता है।
आज जब हम इतने व्यस्त हैं कि अपनों के लिए समय नहीं निकाल पाते, तब जरूरत है खुद को थोड़ा थामने की। याद रखिए, मोबाइल फिर से मिल जाएगा, लेकिन बीता हुआ समय और अपनों की मौजूदगी लौटकर नहीं आती।इसलिए आज ही एक वादा करें — परिवार को समय देंगे, स्क्रीन से नहीं, एक-दूसरे से जुड़ेंगे।