नई दिल्ली | कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को केंद्र की मोदी सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन पर सवाल उठाते हुए इसे अधूरा और दिखावटी बताया। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के वादे जितने बड़े थे, जमीनी हकीकत उतनी ही निराशाजनक है।
खरगे ने आरोप लगाया कि डिजिटल इंडिया के 10 साल पूरे होने के बावजूद लाखों गांव अभी भी ब्रॉडबैंड से वंचित हैं और सरकार की ओर से पारदर्शिता व डेटा निजता को लेकर किए गए दावे खोखले साबित हुए हैं।
भारतनेट परियोजना पर उठाए सवाल
खरगे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट (एक्स) में लिखा, “मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया के दावे फर्जी निकले।” उन्होंने बताया कि सरकार ने भारतनेट प्रोजेक्ट के तहत 6.55 लाख गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक सिर्फ 2.02 लाख गांवों तक ही कनेक्टिविटी पहुंच पाई है — यानी करीब 65 फीसदी गांव अब भी इंतजार में हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना की डेडलाइन को 11 सालों में आठ बार बढ़ाया जा चुका है, जिससे सरकार की गंभीरता पर सवाल उठते हैं।
BSNL-MTNL पर बढ़ते कर्ज का मुद्दा
कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकारी टेलीकॉम कंपनियों BSNL और MTNL की खराब वित्तीय हालत को भी उजागर किया। उनके मुताबिक, मार्च 2014 में BSNL पर 5,948 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो मार्च 2024 तक बढ़कर 23,297 करोड़ रुपये हो गया है — यानी 291.7% की बढ़ोतरी। वहीं, MTNL का कर्ज भी इसी अवधि में 136.2% बढ़कर 33,568 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
5G बनाम BSNL का 4G संकट
खरगे ने सरकार की तकनीकी तैयारियों पर भी तंज कसते हुए कहा कि जब निजी कंपनियां 5G नेटवर्क पर तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं, तब BSNL अभी तक अपना 4G नेटवर्क स्थापित नहीं कर सका है। एक लाख 4G टावर लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से एक तिहाई अब भी नहीं लगाए गए हैं।
‘डिजिटल बहिष्कार’ का आरोप
खरगे का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में समाज के वंचित तबके को दरकिनार कर दिया गया है, जो एक प्रकार से ‘डिजिटल बहिष्कार’ जैसा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिर्फ 0.73 फीसदी ग्राम पंचायतों में ही वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध है, जो दर्शाता है कि डिजिटल इंडिया सिर्फ कागजों पर ही मजबूत दिखता है।