नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 जुलाई से 9 जुलाई 2025 तक एक अहम और बहुपक्षीय विदेश यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। इस दौरान वे घाना, त्रिनिदाद व टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राज़ील और नामीबिया की यात्रा करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य इन देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊर्जा देना और ब्राज़ील में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखना है।
यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम:
घाना (2–3 जुलाई):
करीब तीन दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला दौरा होगा। यहां पीएम मोदी व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और विकास सहयोग पर केंद्रित बैठकें करेंगे। साथ ही भारत-ECOWAS और अफ्रीकी संघ के साथ संबंधों को और गहरा करने की दिशा में काम होगा।
त्रिनिदाद व टोबैगो (3–4 जुलाई):
1999 के बाद पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री इस देश की यात्रा पर जा रहे हैं। इस दौरान पीएम मोदी वहां के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे और संभवतः संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे। इस यात्रा से दोनों देशों के सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
अर्जेंटीना (4–5 जुलाई):
करीब 57 साल बाद यह पहला मौका है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री अर्जेंटीना जा रहे हैं। बातचीत के मुख्य मुद्दे होंगे—रक्षा, कृषि, खनन, ऊर्जा और डिजिटल सहयोग, जिसमें UPI जैसी भारतीय तकनीकों को साझा किया जा सकता है।
ब्राज़ील (5–8 जुलाई):
पीएम मोदी ब्राज़ील में 17वें BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह उनकी चौथी ब्राज़ील यात्रा होगी। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था की रिकवरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य प्रणाली जैसे विषयों पर चर्चा होगी। साथ ही ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला के साथ द्विपक्षीय बातचीत में व्यापार, रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर जोर रहेगा।
नामिबिया (9 जुलाई):
यह प्रधानमंत्री मोदी का नामिबिया का पहला दौरा होगा, जबकि यह देश की तीसरी बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री की मेज़बानी करेगा। वे राष्ट्रपति नेटुम्बो नांदी नदैतवा से मुलाकात करेंगे और संसद को भी संबोधित कर सकते हैं। भारत और नामिबिया के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश की जाएगी।
क्यों खास है यह दौरा?
यह यात्रा भारत की ग्लोबल साउथ में बढ़ती भूमिका को दर्शाती है और राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और डिजिटल साझेदारी को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए द्वार खुलने की संभावना है।