Chandigarh, 8 July
भारत में पढ़ने की संस्कृति को नया आयाम देने के उद्देश्य से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने ‘बिग रीड ग्लोबल चैलेंज 2025’ के सातवें संस्करण की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य स्कूली छात्रों के बीच सृजनात्मक पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना, उनकी विचारशीलता को बढ़ाना और उन्हें वैश्विक मंच पर पहचान दिलाना है।
हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार, भारतीय औसतन हर सप्ताह 10 घंटे 42 मिनट पढ़ने में बिताते हैं, जो कि वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। बावजूद इसके, पढ़ी गई सामग्री को समझने, विश्लेषण करने और उससे जुड़ाव बनाने की क्षमता विशेष रूप से स्कूली बच्चों में अपेक्षाकृत कम पाई गई है।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया के प्रबंध निदेशक सुकांत दास ने इस अवसर पर कहा,“एनसीएफ 2023 में पढ़ने को एक बुनियादी योग्यता के रूप में मान्यता दी गई है, जो सभी विषयों की नींव बनती है। हमारे लिए पढ़ना सिर्फ एक कौशल नहीं, बल्कि जिज्ञासा, सहानुभूति और स्वतंत्र सोच को पोषित करने का माध्यम है।”उन्होंने कहा कि ऑक्सफोर्ड बिग रीड चैलेंज सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक आंदोलन है जो बच्चों की कल्पनाशीलता और मौलिक विचारों का उत्सव है।यह भारत की सबसे बड़ी रीडिंग प्रतियोगिताओं में से एक है, जो छात्रों को किताबों के ज़रिए सोचने, कल्पना करने और अभिव्यक्त करने का मंच देती है। हमें गर्व है कि इसका सातवां संस्करण भारत में हो रहा है।”
प्रतियोगिता के मुख्य बिंदु:
- प्राइमरी, मिडिल और सेकेंडरी स्तर के छात्र भाग ले सकते हैं
- स्कूलों को पंजीकरण कराकर छात्रों को नामित करने का अवसर मिलेगा
- छात्रों को पढ़ी गई किताबों पर आधारित क्रिएटिव लेखन, आर्ट व प्रेजेंटेशन जैसे कार्य प्रस्तुत करने होंगे
- चयनित प्रतिभागियों को मिलेगा प्रशस्ति पत्र और अंतरराष्ट्रीय पहचान
इस पहल का उद्देश्य स्कूली स्तर पर पढ़ने की आदत को मजबूती देना है ताकि बच्चे सिर्फ पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहें, बल्कि ज्ञान की गहराई में उतरने और स्वतंत्र सोच की दिशा में अग्रसर हों।