9 July, 2025
गुरु शिष्य परंपरा की अनुपम मिसाल और श्रद्धा का प्रतीक गुरु पूर्णिमा इस वर्ष 10 जुलाई, गुरुवार को पूरे देश में धार्मिक उत्साह व आस्था के साथ मनाई जाएगी। यह दिन गुरुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है, जब शिष्य अपने आध्यात्मिक, शैक्षणिक व जीवन के मार्गदर्शकों का आभार प्रकट करते हैं।
गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन आदिगुरु वेद व्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने महाभारत की रचना की और चारों वेदों का संपादन किया। अतः इस दिन को ‘व्यास पूर्णिमा’ के रूप में भी जाना जाता है।देशभर के गुरुकुलों, मठों, आश्रमों व विद्यालयों में इस दिन विशेष पूजन, प्रवचन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। शिष्य अपने गुरुओं को पुष्प, वस्त्र, पुस्तकें व अन्य उपहार भेंट करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।इस वर्ष विशेष बात यह है कि गुरु पूर्णिमा चंद्रग्रहण की छाया से मुक्त होगी, जिससे पूजा-पाठ में कोई बाधा नहीं होगी। पंडितों के अनुसार, यह दिन आध्यात्मिक साधना, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत शुभ रहेगा।
गुरु पूर्णिमा मुहूर्त:
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 9 जुलाई को रात 8:28 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 10 जुलाई को रात 10:45 बजे
- गुरु पूजन का शुभ समय: 10 जुलाई को सुबह 8:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक विशेष फलदायी
गुरु का महत्व केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शक तक सीमित नहीं है — जीवन में सही दिशा दिखाने वाले माता-पिता, शिक्षक, और सच्चे मित्र भी गुरुत्व को दर्शाते हैं। इस पावन अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि ज्ञान, विनम्रता और सेवा की भावना को अपने जीवन में स्थान दें।
“गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”