नई दिल्ली | भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) से जुड़ा एक बड़ा टिकट घोटाला सामने आया है। कुछ शातिर ठगों ने हूबहू IRCTC जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइटें बनाकर देशभर के लोगों से अवैध रूप से टिकट बुकिंग कर करोड़ों रुपये की ठगी की। इन वेबसाइट्स का IRCTC से कोई संबंध नहीं था, लेकिन लोग भ्रमित होकर इनसे टिकट बुक करते रहे।
अदालत में सुनवाई शुरू, 10 सितंबर को अगली तारीख
इस मामले में CBI द्वारा दाखिल चार्जशीट पर दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई शुरू करने का आदेश दे दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक कुमार ने 8 जुलाई को सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपों में दम है और सभी आरोपियों को कोर्ट में तलब किया जाए। अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
2020 में हुआ था खुलासा, तब IRCTC अफसर ने दी थी शिकायत
इस पूरे घोटाले की शुरुआत 2020 में एक शिकायत से हुई थी, जब IRCTC के एंटी-फ्रॉड मैनेजर राकेश कुमार मिश्रा ने दिल्ली के द्वारका साइबर सेल में रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि कुछ फर्जी वेबसाइट्स अवैध सॉफ्टवेयर की मदद से रेलवे की आरक्षित टिकटें बुक कर रही हैं।
CBI ने इस शिकायत के बाद तत्काल जांच शुरू की और PMlA (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया।
ये थीं वो फर्जी वेबसाइट्स
जांच में जिन वेबसाइट्स की पहचान हुई, वे इस प्रकार हैं:
- www.tatkalsoftware.asia
- redmirchie.com
- irctctatkalsoftware.co.in
- freetatkalsoftware.com
- tatkalsoftwarebest.in
इन वेबसाइट्स पर अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए टिकट बुकिंग की जा रही थी। ये सॉफ्टवेयर बैंक OTP और IRCTC सुरक्षा तंत्र को बायपास कर देता था।
CBI ने मुख्य आरोपियों को पकड़ा
जांच में सबसे पहले नाम सामने आया राकेश कुमावत का, जिसने बताया कि उसने यह सॉफ्टवेयर एक व्यक्ति अजॉय से खरीदा था। इसके बाद आसिफ अली की पहचान हुई, जो फर्जी वेबसाइट चला रहा था। 1 सितंबर 2021 को CBI ने उसके ठिकानों पर छापे मारे और मोबाइल फोन, लैपटॉप, कई सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज और एक डायरी जब्त की।
इसके बाद 19 अप्रैल 2023 को रोहित कुमार मौर्य और राजीव कुमार मौर्य के यहां भी CBI ने रेड की। उनसे भी डिजिटल डिवाइसेज़, IRCTC एजेंट आईडी, डिजिटल सिग्नेचर CD और संदिग्ध दस्तावेज मिले।
आम लोगों से वसूला जा रहा था ज्यादा पैसा
CBI की जांच में सामने आया कि ये लोग टिकट के बदले में यात्रियों से IRCTC की निर्धारित कीमत से कहीं ज्यादा पैसे वसूल रहे थे। ये ठग न केवल यात्रियों को चूना लगा रहे थे, बल्कि बैंकिंग सिस्टम और OTP सुरक्षा प्रणाली को भी चकमा दे रहे थे।
CBI ने इसे एक गंभीर साइबर और आर्थिक अपराध करार दिया है, जिसमें आम नागरिकों की जेब पर सीधा असर पड़ा।
क्या थी ठगी की तरकीब?
- नकली वेबसाइट्स IRCTC जैसी डिज़ाइन की जाती थीं
- हाई-टेक सॉफ्टवेयर से टिकट बुकिंग की जाती
- एजेंटों के जरिए लोगों से ऊंची कीमत वसूली जाती
- सॉफ्टवेयर OTP और वैरिफिकेशन सिस्टम को बायपास करता था