11 July, 2025
आज, 11 जुलाई से पवित्र सावन माह की शुरुआत हो गई है, और इसके साथ ही देशभर में शिवभक्तों द्वारा कांवड़ यात्रा की भी विधिवत शुरुआत हो चुकी है। “बोल बम” के जयकारों से गूंजते मार्गों पर हजारों श्रद्धालु गंगाजल लेने के लिए पवित्र नदियों की ओर बढ़ चले हैं। ये भक्तजन गंगा से जल भरकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए लंबी पैदल यात्रा करते हैं।
कांवड़ यात्रा की तिथि और महत्व
इस वर्ष सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 11 जुलाई को तड़के 2:06 बजे से शुरू हुई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है। इस विशेष योग में कांवड़ यात्रा का आरंभ होना विशेष फलदायी माना जाता है।
कब तक चलेगी यात्रा?
यह यात्रा 11 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलेगी। इसके पश्चात, शिवभक्त अपने गृहनगर या नजदीकी शिवालय में जाकर भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करेंगे। सावन माह का समापन 9 अगस्त, शनिवार को होगा।
पहला कांवड़िया: पौराणिक कथाओं की झलक
मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब विष निकला, तो भगवान शिव ने उसे पीकर त्रिलोक की रक्षा की। विष की तीव्रता से उत्पन्न जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने पवित्र नदियों के जल से उनका अभिषेक किया। तभी से सावन में जल चढ़ाने की परंपरा आरंभ हुई।
एक अन्य कथा में लंका नरेश रावण को प्रथम कांवड़िया माना गया है। मान्यता है कि उसने सावन के दौरान गंगाजल लाकर भगवान शिव का पूजन किया था।
कांवड़ यात्रा का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व
- यह यात्रा शिवभक्तों के लिए भक्ति, समर्पण और शुद्धता का प्रतीक है।
- ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव कांवड़ यात्रा से अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
- भक्त को पाप, भय और दुखों से मुक्ति मिलती है।
- गंगाजल से अभिषेक करने पर मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
- कांवड़ियों को शिव का परम भक्त माना जाता है।
यात्रा के नियम और आचार-संहिता
- पूर्ण सात्विक जीवन का पालन करें।
- यात्रा के दौरान संयम, शांति और स्वच्छता बनाए रखें।
- मांसाहार, मादक पदार्थ और तामसिक आहार से दूरी रखें।
- पूरी श्रद्धा और धैर्य के साथ यात्रा पूर्ण करें।