13 July, 2025
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस वर्ष सावन का पहला सोमवार 14 जुलाई को पड़ रहा है, और देशभर के शिव भक्तों में इस दिन को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। मंदिरों में तैयारियाँ जोरों पर हैं और श्रद्धालु पूजा-व्रत की तैयारी में जुटे हैं।
सावन सोमवार का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि सावन सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से कुंवारी कन्याएं योग्य वर के लिए और सुहागिनें पति की लंबी उम्र व सुखमय दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि सावन में माता पार्वती ने कठोर तप करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था, इसलिए यह समय शिव-शक्ति की उपासना के लिए अत्यंत शुभ है।
पूजा विधि: ऐसे करें शिव-पार्वती की आराधना
- सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करके साफ वस्त्र पहनें।
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और शुद्ध जल से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, आक, धतूरा, भस्म, चंदन, पुष्प और भांग भगवान शिव को अर्पित करें।
- माता पार्वती को हरी चूड़ियाँ, मेहंदी, काजल, सिंदूर और सुहाग सामग्री अर्पण करें।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिव पुराण का पाठ करें।
- दिनभर व्रत रखें और शाम को दीप जलाकर शिव-पार्वती की आरती करें।
- अंत में व्रत कथा सुनें और प्रसाद वितरण करें.
- सुहागिनों के लिए विशेष परंपरा
सावन सोमवार के दिन सुहागिनें माता पार्वती को हरी चूड़ियाँ, चुनरी और सुहाग का सामान अर्पित करती हैं। इससे उनके दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है। कई जगहों पर महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा करती हैं और एक-दूसरे को मेहंदी व चूड़ियाँ भेंट करती हैं, जो आपसी प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक होता है।
मंदिरों में विशेष आयोजन
वाराणसी, उज्जैन, हरिद्वार, नासिक, देवघर जैसे प्रसिद्ध शिवधामों में इस दिन विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। लाखों श्रद्धालु शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए कांवड़ यात्रा पर भी निकल चुके हैं।
धर्मगुरु कहते हैं: “सावन सोमवार के दिन की गई पूजा विशेष फलदायी होती है। शिवजी कृपालु हैं, और भक्ति से प्रसन्न होकर शीघ्र आशीर्वाद प्रदान करते हैं।”