14 July, 2025
जैसे ही आसमान से सावन की रिमझिम फुहारें गिरती हैं, पूरा वातावरण हरियाली से सराबोर हो जाता है। पेड़ों की पत्तियाँ निखर उठती हैं और धरती मानो हरी चूनर ओढ़ लेती है। इसी मौसम में महिलाओं और युवतियों के चेहरे पर एक अलग ही रौनक दिखाई देती है — झूले, मेहंदी और लोकगीतों की मधुर धुनें सावन को खास बना देती हैं।
शहरों से लेकर गाँवों तक, हर ओर बाग-बगिचों में झूले डाले जाते हैं। रंग-बिरंगे कपड़े पहने युवतियाँ पेड़ों पर झूलती हैं और “कजरी” व “झूला गीतों” की मधुर स्वर लहरियाँ वातावरण को सुरमयी बना देती हैं।
मेहंदी की खुशबू से महकते हाथ – सावन में महिलाएं हाथों पर intricate मेहंदी डिज़ाइन्स बनवाती हैं। बाज़ारों में मेहंदी की दुकानों पर भीड़ लगी रहती है। यह केवल श्रृंगार का प्रतीक नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है।
“सावन का महीना तो हमारे लिए सबसे खास होता है,” लखनऊ की रहने वाली पूजा तिवारी बताती हैं। “हम सहेलियाँ मिलकर मेहंदी लगाती हैं, झूला झूलते हैं और गीत गाते हैं — ये परंपरा पीढ़ियों से चलती आ रही है।”
सावन और तीज-त्योहारों का गहरा नाता है। इस मौसम में महिलाएं तीज व्रत करती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक पोशाकों में सजकर देवी की पूजा करती हैं।मौसम विभाग के अनुसार, इस वर्ष सावन में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है, जिससे हरियाली और भी मनमोहक होगी।