गुरुग्राम | हरियाणा के गुरुग्राम में जमीन घोटाले का एक बड़ा मामला सामने आया है। हीरो होंडा चौक के पास स्थित लगभग डेढ़ एकड़ सरकारी जमीन को कथित तौर पर धोखाधड़ी से बेचने के आरोप में पुलिस ने पूर्व उद्योगपति राकेश बत्रा सहित कई सरकारी अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
इस जमीन का अधिग्रहण हरियाणा शहरी विकास परिषद (HSVP) ने सेक्टर-37 के औद्योगिक विस्तार और बादशाहपुर ड्रेन के चौड़ीकरण के लिए किया था। लेकिन आरोप है कि राकेश बत्रा ने कादीपुर तहसील के अधिकारियों और HSVP कर्मियों की मिलीभगत से इस जमीन पर अवैध कॉलोनी काटी और उसे निजी लोगों को बेच दिया।
ACB की जांच में खुला मामला
रेवाड़ी निवासी प्रवीण राव की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस पूरे मामले की जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि राकेश बत्रा ने पांच एकड़ जमीन पर 22 प्लॉट बनाए, जिनमें से कई प्लॉट अपने भाई पवन बत्रा और बेटे अमन बत्रा के नाम किए गए।
ज्यादातर प्लॉट HSVP के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी गुलशन कुमार के परिवार को बेचे गए, जिनमें से दो प्लॉट उनकी पत्नी वंदना के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। आरोप है कि इस पूरे घोटाले में HSVP की 7712 वर्ग गज जमीन का अवैध सौदा किया गया।
आरोपियों की लिस्ट में कौन-कौन
इस जमीन घोटाले में पुलिस ने जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, उनमें शामिल हैं:
- राकेश बत्रा (पूर्व उद्योगपति)
- सतीश कुमार (नायब तहसीलदार)
- पारुष पहल (नायब तहसीलदार)
- नेहा (नायब तहसीलदार)
- अख्तर हुसैन (नायब तहसीलदार)
- सूरतमल (पटवारी)
- गुलशन कुमार (HSVP के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी)
सवालों के घेरे में सरकारी तंत्र
इस घोटाले ने न केवल सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी साफ किया है कि कैसे अधिकारियों और रसूखदारों की मिलीभगत से करोड़ों की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और बिक्री की गई। मामले की जांच फिलहाल जारी है, और उम्मीद की जा रही है कि अन्य नाम भी जल्द सामने आ सकते हैं। यह मामला राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के लिए भी एक अहम परीक्षण बन गया है।