लखनऊ | मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने संसद के कामकाज को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह सत्र सिर्फ शोर-शराबे और आरोप-प्रत्यारोप की भेंट न चढ़े, बल्कि जनता से जुड़े असल मुद्दों पर सार्थक बहस का मंच बने।
सोमवार को एक बयान में मायावती ने कहा कि संसद के सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, महिला सुरक्षा और भाषा विवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर ठोस बहस होनी चाहिए, ताकि सरकार जनहित में प्रभावी नीति और योजनाएं बना सके। उन्होंने यह भी चेताया कि अगर यह सत्र भी पिछली बार की तरह राजनीतिक टकराव में ही उलझ गया, तो देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोगों का भरोसा टूटेगा।
“महंगाई-बेरोजगारी से जूझ रहा देश, संसद से चाहिए समाधान”
मायावती ने यह भी कहा कि देश आंतरिक चुनौतियों के साथ-साथ बाहरी खतरों से भी जूझ रहा है। इन हालातों में सिर्फ सरकार की राजनीतिक सतर्कता ही काफी नहीं, बल्कि विपक्ष और जनता को विश्वास में लेकर चलना वक्त की मांग है। उन्होंने कहा कि अगर सभी दल राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें और एकजुट होकर ठोस कदम उठाएं, तो इससे देश के बहुजनों और सर्वसमाज को वास्तविक लाभ मिलेगा।
“लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी है विपक्ष की भागीदारी”
BSP सुप्रीमो ने स्पष्ट किया कि वैश्विक राजनीतिक-आर्थिक अस्थिरता के दौर में भारत की लोकतांत्रिक संप्रभुता को नए खतरे झेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार अगर विपक्ष को विश्वास में लेकर आगे बढ़ेगी, तो देशहित में बेहतर नतीजे सामने आएंगे।