25 July, 2025
संसद में बुधवार को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य भारतीय खेल व्यवस्था को एक नई दिशा देना, एथलीटों के हितों की रक्षा करना और खेल संगठनों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
विधेयक के अनुसार, देश में केवल एक राष्ट्रीय ओलंपिक समिति, एक राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति, और हर मान्यता प्राप्त खेल के लिए एक राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय खेल महासंघ होगा, जो संबंधित अंतरराष्ट्रीय निकायों से संबद्ध होंगे।
खिलाड़ियों को उम्र में छूट और प्रशासनिक सुधार
AIFF अध्यक्ष कल्याण चौबे ने विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह विधेयक ऐसे समय में आ रहा है जब भारत खेलों के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। जहां सभी खेल महासंघ किसी न किसी कानूनी लड़ाई में उलझे हैं, वहां यह विधेयक एक सुव्यवस्थित और पारदर्शी ढांचा लाने की कोशिश करता है।”उन्होंने आगे कहा, “यह विधेयक एथलीटों को उम्र सीमा में कुछ छूट देता है, जो कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए राहत की बात है। इसके अलावा, कॉर्पोरेट भागीदारी, राज्य और केंद्र सरकारों के सहयोग, और खेल नीति की दीर्घकालिक योजना जैसी बातें इसमें शामिल हैं।”
कल्याण चौबे ने केंद्रीय खेल मंत्री की सराहना करते हुए कहा कि “मैंने 30 वर्षों से ज्यादा फुटबॉल में बिताए हैं, लेकिन कभी नहीं देखा कि कोई खेल मंत्री पूरे दिन यह सोचने में लगाए कि आने वाले 10 वर्षों में खेल क्षेत्र में क्या होना चाहिए। यह एक नई सोच है।”
विधेयक की प्रमुख बातें:
- राष्ट्रीय खेल बोर्ड की स्थापना की जाएगी, जो खेल संगठनों को मान्यता देगा, उनका पंजीकरण करेगा, और आवश्यकता पड़ने पर मान्यता रद्द भी कर सकेगा।
- बोर्ड का मुख्यालय दिल्ली में होगा और देशभर में इसके शाखा कार्यालय खोले जा सकेंगे।
- बोर्ड के सदस्य और अध्यक्ष ऐसे लोग होंगे जिनके पास खेल प्रशासन, खेल कानून या लोक प्रशासन का अनुभव होगा।
- किसी भी संगठन को “भारत”, “भारतीय”, “राष्ट्रीय” जैसे शब्दों या प्रतीकों के उपयोग के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी।
- यदि किसी खेल संगठन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता समाप्त होती है, तो सामान्यीकरण प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ही संचालित होगी, जिसमें बोर्ड हस्तक्षेप नहीं करेगा।
- सरकार राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल भी गठित कर सकती है, जिसमें पूर्व चुनाव आयुक्त जैसे अनुभवी व्यक्ति शामिल होंगे।
- एक न्यायाधिकरण का भी गठन किया जाएगा, जिसके अध्यक्ष और सदस्य सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, विधि मंत्रालय और खेल मंत्रालय के सचिवों की समिति की सिफारिशों पर केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे।
निष्कर्ष:
राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 भारतीय खेल प्रणाली में सुधार, संविधानिक ढांचा, और खिलाड़ियों की बेहतरी की दिशा में एक साहसिक कदम माना जा रहा है। संसद में भले ही इसकी प्रस्तुति के दौरान शोरगुल रहा हो, लेकिन इसके दूरगामी प्रभाव भारतीय खेलों की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं।