29 July, 2025
भारत की नई शतरंज सनसनी दिव्या देशमुख ने पूरी दुनिया को अपने शानदार खेल से चौंका दिया है। महज 19 साल की उम्र में वह फिडे महिला विश्व कप चैंपियन बनकर उभरी हैं, और इसी के साथ उन्होंने देश की 88वीं ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव भी हासिल किया है। किशोरावस्था से ही शतरंज की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली दिव्या अब एक प्रेरणा बन चुकी हैं।
महाराष्ट्र के नागपुर की रहने वाली दिव्या ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भगवानदास पुरोहित विद्या मंदिर में प्राप्त की, जहां शतरंज के प्रति उनकी रुचि ने पहली बार आकार लिया। दिलचस्प बात यह है कि दिव्या के माता-पिता, डॉ. जितेंद्र देशमुख और डॉ. नम्रता देशमुख, पेशे से डॉक्टर हैं। इसी वजह से दिव्या ने भी शुरुआत में डॉक्टर बनने का सपना देखा था, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था।
खेल की दुनिया में अपने अद्भुत कौशल और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह न केवल उनकी मेहनत का फल है, बल्कि भारत के लिए गर्व की बात भी है। दिव्या आज अपने खेल के साथ-साथ अपनी सादगी और सौम्यता के लिए भी जानी जाती हैं, जो उन्हें वाकई खास बनाता है।