नई दिल्ली | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत में प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) के मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू के बीच कथित पत्राचार ने भूचाल ला दिया है। व्हाइट हाउस लेटरहेड पर 24 जुलाई, 2025 की तारीख वाला यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। हालांकि पत्र की वैधता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है।
ट्रंप ने पत्र में पन्नू के विचारों का ‘धन्यवाद’ किया और अमेरिका की विदेश सहायता नीतियों की समीक्षा का जिक्र किया। उन्होंने अमेरिका की सुरक्षा और करदाताओं के पैसे के ‘सही इस्तेमाल’ को प्राथमिकता देने की बात भी कही। इस पूरे घटनाक्रम को भारत विरोधी साजिश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे ट्रंप का कथित भारत विरोधी रवैया उजागर होता है।
गौरतलब है कि पन्नू भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी है और SFJ पर देश विरोधी गतिविधियों का आरोप है। भारत ने कई बार अमेरिका से उसकी प्रत्यर्पण की मांग की है। ऐसे में ट्रंप की चिट्ठी को भारत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। विदेश में बैठे कुछ खालिस्तानी गुट इस पत्र को “अंतरराष्ट्रीय मान्यता” की तरह प्रचारित कर रहे हैं।
पन्नू ने भी इस पत्र को हथियार बनाकर बयान दिया है कि “हमने गोली नहीं, वोट को चुना है” और 17 अगस्त को ‘सिख जनमत संग्रह’ का एलान किया है। इस घटनाक्रम ने भारत की आंतरिक सुरक्षा, अमेरिका-भारत संबंध और पंजाब की सियासत तीनों को एक नई बहस के केंद्र में ला दिया है।