Kullu, Manminder
हाल ही में हुई भारी वर्षा के चलते कांगड़ा जिला की पौंग झील में बहकर आई लकड़ियों की जांच में यह सामने आया है कि अधिकांश लकड़ी बालन (ईंधन हेतु उपयोगी) श्रेणी की है, न कि इमारती लकड़ी। यह लकड़ी जंगलों से बहती हुई ब्यास नदी के माध्यम से पौंग डैम तक पहुंची है।
वन्य प्राणी विभाग द्वारा झील से इस बालन लकड़ी को निकाला गया है और निकट भविष्य में इसकी नीलामी की जाएगी। इसके साथ ही झील में बहकर आए अन्य गार्बेज और कचरे को भी विभाग द्वारा हटाया जाएगा।
डीएफओ वाइल्ड लाइफ, हमीरपुर, रेजिनॉल्ड रॉयस्टन ने बताया कि झील में बहकर आई लकड़ी महंगी इमारती श्रेणी की नहीं है, बल्कि यह सिर्फ बालन लकड़ी है, जिसका उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में किया जा सकता है। झील की सफाई प्रक्रिया वन्य जीवन के संरक्षण और जल पर्यावरण की दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है।