1 August, 2025
रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। रक्षा बंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि रक्षा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।रक्षा बंधन के पीछे कई धार्मिक और पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। इनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं
1. महाभारत की कथा – कृष्ण और द्रौपदी
महाभारत के समय की एक प्रसिद्ध कथा है। एक बार श्रीकृष्ण का हाथ घायल हो गया और रक्त बहने लगा। द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर उनके हाथ पर बांध दिया। कृष्ण भावुक हो उठे और उन्होंने जीवनभर द्रौपदी की रक्षा करने का वचन दिया। यही बंधन आगे चलकर रक्षाबंधन का प्रतीक माना गया।
2. इंद्र और इंद्राणी की कथा
देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हो रहा था। देवराज इंद्र बार-बार पराजित हो रहे थे। तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने एक पवित्र धागा मंत्रों से अभिमंत्रित करके इंद्र की कलाई पर बांधा और उनकी विजय की कामना की। इस धागे की शक्ति से इंद्र ने युद्ध में जीत हासिल की।
3. राजा बलि और देवी लक्ष्मी की कथा
एक बार भगवान विष्णु ने दानवराज बलि को वचन दिया कि वे पाताललोक में उनके द्वारपाल रहेंगे। देवी लक्ष्मी चिंतित हो गईं। तब उन्होंने बलि को राखी बाँधी और भाई मानकर विष्णु को अपने साथ ले जाने का वरदान माँग लिया। इस प्रकार राखी ने विष्णु को वापस लक्ष्मी के पास पहुँचा दिया।
4. यम और यमुनाजी की कथा
यमराज की बहन यमुनाजी हर वर्ष भाई को राखी बाँधती थीं। एक बार जब यमराज बहुत समय तक उनसे मिलने नहीं आए, तो गंगा ने उन्हें याद दिलाया। यमुनाजी ने राखी बाँधकर यमराज से अपने भाई की लंबी उम्र का वर माँगा। तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि बहन राखी बाँधकर भाई की दीर्घायु की कामना करती है।
इन कथाओं से स्पष्ट है कि रक्षा बंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि रक्षा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।