चरखी दादरी | हरियाणा के छोटे से गांव बौंद खुर्द की बेटी रचना परमार उर्फ ‘भंभो पहलवान’ ने ग्रीस में आयोजित अंडर-17 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर गांव, जिला और देश का नाम रोशन कर दिया। गांव लौटने पर रचना का ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत किया।
17 वर्षीय रचना ने 43 किलोग्राम भारवर्ग में चीन की खिलाड़ी को 3-0 से हराकर यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इससे पहले भी रचना एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। अब उसका अगला लक्ष्य 2028 ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक लाना है।
“बेटी नहीं, बेटा पैदा किया है” — पिता का जज़्बा
रचना के पिता अजीत नंबरदार और मां क्षमा देवी, जो गांव की सरपंच भी हैं, अपनी बेटी की इस उपलब्धि से गर्व से भर उठे हैं। सरपंच प्रतिनिधि अजीत ने कहा, “बेटी को ओलंपिक में खेलने भेजना है, चाहे इसके लिए जमीन ही क्यों न बेचनी पड़े। हमने बेटी नहीं, बेटा पैदा किया है, और उसका सपना पूरा करना हमारी ज़िम्मेदारी है।”
रचना की कहानी: भाई के साथ अखाड़े से वर्ल्ड चैंपियन बनने तक
रचना ने बताया कि करीब आठ साल पहले वह अपने भाई के साथ पहली बार अखाड़े में गई थी। कोच ने उसमें छिपी प्रतिभा को पहचाना और फिर मेहनत का जो सफर शुरू हुआ, उसने उसे आज वर्ल्ड चैंपियन बना दिया। रचना ने गीता-बबीता फोगाट से प्रेरणा लेकर कुश्ती को चुना और आज कई अंतरराष्ट्रीय मेडल अपने नाम कर चुकी है।
ब्रजभूषण शरण से प्रेरणा, ओलंपिक में गोल्ड का सपना
रचना परमार ने कहा कि वह भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण को ही अपना प्रेरणास्त्रोत मानती हैं। उन्होंने कहा, “ब्रजभूषण जी ने भारतीय कुश्ती को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्हीं की वजह से हम जैसे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर पा रहे हैं।” अब रचना का एकमात्र लक्ष्य 2028 ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।