सर्रे (ब्रिटिश कोलंबिया) | कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सर्रे शहर में स्थित एक सिख गुरुद्वारे में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जानकारी के मुताबिक, प्रतिबंधित संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) और सर्रे के गुरु नानक सिख गुरुद्वारे द्वारा कथित तौर पर ‘खालिस्तान एंबेसी’ खोली गई है। यह दफ्तर गुरुद्वारे के कम्युनिटी सेंटर में स्थापित किया गया है।
बताया जा रहा है कि इस कथित ‘एंबेसी’ के लिए फंडिंग कनाडा और अमेरिका से जुटाई गई। वहीं, जानकारों का मानना है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग लंबे समय से विदेशों में बैठकर खालिस्तानी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं।
सरकारी फंड से हुआ निर्माण, अब उठ रहे सवाल
खास बात यह है कि यह वही कम्युनिटी सेंटर है जिसे ब्रिटिश कोलंबिया सरकार ने हाल ही में 90 लाख रुपए ($1,50,000) की फंडिंग दी थी। यह राशि यहां लिफ्ट लगाने के लिए दी गई थी। अब जब उसी इमारत में कथित ‘खालिस्तान एंबेसी’ खोली गई है, तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या कनाडा सरकार के पैसों का दुरुपयोग हो रहा है?
स्थानीय भारतीय समुदाय, विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इस घटनाक्रम की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह न सिर्फ कनाडा की एकता के खिलाफ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उग्रवाद को भी बढ़ावा देता है।
सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले पर ब्रिटिश कोलंबिया और कनाडा सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं:
- क्या सरकारी फंड से देशविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है?
- क्या इससे समाज में नफरत और विभाजन फैलाने वाली ताकतें मजबूत नहीं होंगी?
- और सबसे अहम – क्या खालिस्तानी संगठनों को अब खुलेआम ऐसे प्रतीकात्मक ढांचे खड़े करने की छूट मिल रही है?
ऐतिहासिक मिसालें भी रही हैं
यह पहला मौका नहीं है जब विदेश में खालिस्तानी समूहों ने खुद को ‘राजनयिक पहचान’ देने की कोशिश की हो। 1980 के दशक में जगजीत सिंह चौहान ने इक्वाडोर में खुद को ‘खालिस्तान का राष्ट्रपति’ बताते हुए ‘खालिस्तान एंबेसी’ की स्थापना की थी। हालांकि बाद में वह भारत लौटे और राजनीति से दूर शांत जीवन बिताया।