बीजिंग | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया कोशिशें पाकिस्तान के साथ रणनीतिक रिश्ते मजबूत करने की ओर इशारा करती हैं, लेकिन इसपर चीन में बेचैनी दिख रही है। बीजिंग के रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अमेरिकी प्रलोभनों से आकर्षित जरूर हो सकता है, लेकिन वह अपने पुराने रणनीतिक साझेदार चीन से दूरी बनाने का जोखिम नहीं उठाएगा।
दरअसल, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में ट्रंप से मुलाकात के बाद चीन का दौरा किया। जहां उन्होंने चीन के शीर्ष नेताओं से मुलाकात तो की, लेकिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग से नहीं मिले—जो उनके पूर्ववर्ती बाजवा के उलट है। इस घटना को लेकर चीनी विश्लेषक पाकिस्तान की नई कूटनीतिक दिशा पर सवाल उठा रहे हैं।
‘चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेंपररी इंटरनेशनल रिलेशंस’ के दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ हू शीशेंग ने कहा, “पाकिस्तान चीन को नजरअंदाज नहीं करेगा। ट्रंप की रणनीति सीमित है और पाकिस्तान इसका इस्तेमाल केवल सामयिक लाभ के लिए करेगा।”
वहीं, ‘हुआक्सिया साउथ एशिया इकोनॉमिक एंड कल्चरल एक्सचेंज सेंटर’ के शोधकर्ता जेसी वांग का मानना है कि ट्रंप की पहल चीन-पाक संबंधों की ‘संरचनात्मक स्थिरता’ को नहीं हिला सकती।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के लिए अमेरिका और चीन के बीच संतुलन साधना एक तात्कालिक कूटनीतिक जरूरत हो सकती है, लेकिन आर्थिक, सुरक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से वह अब भी चीन पर ज्यादा निर्भर है।