यमुनानगर | देश की बहुचर्चित आयुष्मान भारत योजना हरियाणा में संकट के दौर से गुजर रही है। राज्य के निजी अस्पतालों ने योजना के तहत मरीजों का इलाज करना बंद कर दिया है। वजह है — बीते पांच महीने से लंबित सरकारी भुगतान। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के आह्वान पर लिए गए इस सामूहिक फैसले ने हजारों मरीजों की चिंता बढ़ा दी है।
14 अगस्त तक अल्टीमेटम, फिर होगा बड़ा फैसला
आईएमए ने ऐलान किया है कि 14 अगस्त तक योजना के तहत किसी भी मरीज का इलाज नहीं किया जाएगा। यदि इस दौरान कोई समाधान नहीं निकलता, तो इससे भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। संगठन का कहना है कि बार-बार आग्रह के बावजूद राज्य सरकार ने अस्पतालों के बकाया भुगतान की ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
मरीजों की तकलीफ़ें बढ़ीं, इलाज अधर में
इस फैसले से सबसे ज़्यादा असर गरीब और गंभीर रोगों से जूझ रहे उन मरीजों पर पड़ा है जो इस योजना के भरोसे इलाज करवा रहे थे। यमुनानगर के कई अस्पतालों में कैंसर, हर्निया और अन्य जटिल बीमारियों के मरीज लौटाए जा रहे हैं। एक मरीज के परिजन ने व्यथा जताते हुए कहा, “पहले इसी योजना से इलाज करवाया था, अब पैसा नहीं है तो कोई इलाज भी नहीं। हम बेबस हैं।”
स्वास्थ्य विभाग पर उंगली, नीति पर सवाल
हरियाणा मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉ. जे. के. गुलाटी ने बताया कि यमुनानगर के करीब 30 निजी अस्पताल इस योजना में पंजीकृत हैं, पर सरकार की ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति और भुगतान में देरी ने व्यवस्था को बिगाड़ दिया है। उन्होंने कहा कि यदि पारदर्शिता और समय पर भुगतान नहीं हुआ तो पूरे राज्य में योजना ठप हो सकती है।
गरीबों की उम्मीद अधर में
जहाँ एक ओर यह योजना गरीबों के लिए संजीवनी मानी जाती है, वहीं निजी अस्पतालों के इस फैसले ने मरीजों के समक्ष विकट स्थिति खड़ी कर दी है। मरीजों और उनके परिवारों ने सरकार से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द भुगतान कर योजना को पुनः शुरू करवाया जाए।