Summer express, नई दिल्ली | संसद के विशेष सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। सरकार ने इन दोनों विधेयकों सहित तीन अहम प्रस्तावों को लोकसभा में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की, जबकि विपक्ष ने इनका जोरदार विरोध किया। सरकार का दावा है कि ये विधेयक चुनावी और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, वहीं विपक्ष ने इन्हें लोकतांत्रिक संतुलन पर असर डालने वाला बताया है।
लोकसभा में कार्यवाही की शुरुआत हंगामे के साथ हुई, जब कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को पेश करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 को सदन में प्रस्तुत करने का प्रस्ताव दिया। इन प्रस्तावों के बाद सदन में माहौल गरमा गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष आमने-सामने आ गए।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इन तीनों विधेयकों के पेश किए जाने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना पर्याप्त चर्चा के महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ा रही है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उनके विरोध के बाद संसद में बहस और तेज होने के संकेत मिले।
इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वेणुगोपाल की आपत्तियों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष विधेयकों के गुण-दोष पर बहस करने के बजाय केवल तकनीकी आपत्तियां उठा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को ठोस जवाब दिया जाएगा।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव देश की चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे सत्ता संतुलन पर असर डालने वाला कदम मान रहा है। इस मुद्दे पर संसद में आगे भी तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।