अमेरिका | एक समय था जब अमेरिका और सोवियत संघ (अब रूस) के बीच परमाणु हथियारों की दौड़ को थामने के लिए एक के बाद एक ऐतिहासिक समझौते हुए थे। लेकिन अब वो सभी संधियाँ या तो टूट चुकी हैं या मृतप्राय हो चुकी हैं। मौजूदा समय में केवल ‘न्यू स्टार्ट’ संधि ही ऐसी एकमात्र व्यवस्था है, जो अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों की संख्या पर अंकुश लगाए हुए है—और वो भी सिर्फ 2026 तक।
INF संधि भी इतिहास बनी
1987 में की गई INF संधि, जो मध्यम दूरी की परमाणु मिसाइलों (500 से 5,500 किमी) पर रोक लगाती थी, पहले अमेरिका ने तोड़ी और अब रूस ने भी इसे औपचारिक रूप से छोड़ दिया है। अमेरिका ने आरोप लगाया था कि रूस इस संधि का उल्लंघन कर रहा है, जबकि रूस ने इस दावे को खारिज करते हुए खुद को इससे अलग कर लिया।
‘न्यू स्टार्ट’ संधि पर भी छाया संकट
2010 में हस्ताक्षरित ‘न्यू स्टार्ट’ संधि फिलहाल दोनों देशों को रणनीतिक परमाणु हथियारों की सीमा में बांधती है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने इस संधि में अपनी भागीदारी “स्थगित” कर दी है। इसके चलते निरीक्षण और पारदर्शिता की प्रक्रिया ठप हो गई है। हालांकि रूस यह दावा करता है कि वह अब भी संधि की सीमाओं का पालन कर रहा है।
नई परमाणु दौड़ की आशंका
विशेषज्ञों की राय में अमेरिका और रूस के बीच अब किसी नई संधि की संभावना बेहद क्षीण है, क्योंकि दोनों देशों के बीच विश्वास पूरी तरह समाप्त हो चुका है। अमेरिका अब अपनी रणनीति चीन और ईरान जैसे देशों की ओर मोड़ रहा है, जो परमाणु क्षमता बढ़ा रहे हैं।
चीन पर टिकी दुनिया की नजर
चीन की बढ़ती परमाणु ताकत को देखते हुए अमेरिका का मानना है कि पूर्ववर्ती संधियाँ, जैसे INF, अब प्रासंगिक नहीं हैं क्योंकि वे चीन को शामिल नहीं करती थीं। इससे परमाणु हथियारों की एक नई और खतरनाक दौड़ की जमीन तैयार होती दिख रही है।
MAD अवधारणा अभी भी प्रासंगिक
बावजूद इसके, कुछ जानकार मानते हैं कि “परस्पर सुनिश्चित विनाश” यानी Mutually Assured Destruction (MAD) का सिद्धांत अभी भी शक्तिशाली देशों को संयम में रखने के लिए मजबूर करता है। लेकिन मौजूदा हालात यही संकेत देते हैं कि परमाणु संतुलन अब अतीत की तरह स्थिर नहीं रह गया है।