जम्मू-कश्मीर | भारतीय रेलवे ने जम्मू-कश्मीर को राष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क से जोड़ते हुए इतिहास रच दिया है। पंजाब के रूपनगर से कश्मीर के अनंतनाग तक पहली बार मालगाड़ी सफलतापूर्वक पहुंचाई गई है, जिसे घाटी के आर्थिक विकास के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस मालगाड़ी में लगभग 1,380 मीट्रिक टन सीमेंट लदी थी, जो स्थानीय निर्माण कार्यों और उद्योगों के लिए अहम है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे माल परिवहन की लागत घटेगी, बाजारों तक पहुंच बढ़ेगी और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि अनंतनाग में माल ढुलाई सुविधा से तेज़ और किफायती रसद सेवा संभव होगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सेवा से कश्मीर के फल और हस्तशिल्प उद्योगों को भी बड़ा लाभ होगा। सोपोर फल मंडी के अध्यक्ष फ़याज़ अहमद मलिक ने बताया कि दिल्ली तक फलों के परिवहन का किराया ₹100 से घटकर ₹30 हो सकता है और समय छह दिन से घटकर मात्र 30 घंटे हो जाएगा। इससे घाटी की चेरी, स्ट्रॉबेरी जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलें देश के बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी।
पहली खेप गुरुवार देर रात ऑर्डर की गई थी, शुक्रवार को माल लोड हुआ और शनिवार दोपहर तक ट्रेन अनंतनाग पहुंच गई, यानी मात्र 40 घंटे में पूरी डिलीवरी पूरी हुई। इस सुविधा से सड़क पर निर्भरता कम होगी, लागत घटेगी और समय का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में उद्घाटित उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना और वंदे भारत ट्रेन सेवा की शुरूआत के बाद आई है, जो जम्मू-कश्मीर में विकास की नई रफ्तार को दर्शाती है।