Chandigarh, 29 August
कैंसर केयर को और अधिक उन्नत और सटीक बनाने की दिशा में फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली ने इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक मेडिसिन की शुरुआत की है। यह संस्थान जीनोमिक तकनीक की मदद से कैंसर की पहचान, बचाव और टार्गेटेड ट्रीटमेंट पर काम करेगा।
नए इंस्टीट्यूट में की जाने वाली जेनेटिक टेस्टिंग जीन्स, क्रोमोज़ोम्स और डीएनए पैटर्न में मौजूद बदलावों का पता लगाएगी। इससे न केवल कैंसर पैदा करने वाले जीन की पहचान संभव होगी, बल्कि यह भी अनुमान लगाया जा सकेगा कि किसी व्यक्ति में भविष्य में कैंसर का खतरा कितना है। इस तरह मरीजों को समय रहते सटीक और व्यक्तिगत उपचार (Personalized Treatment) मिल पाएगा।
विशेषज्ञों की राय
इंस्टीट्यूट की शुरुआत पर डॉ. रवनीत कौर (एसोसिएट कंसल्टेंट, मेडिकल जेनेटिक्स) ने बताया,“जीनोमिक टेस्टिंग आमतौर पर रक्त, लार या ट्यूमर टिश्यूज के सैम्पल से की जाती है। एडवांस्ड तकनीक जैसे नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग और लिक्विड बायोप्सी कैंसर कोशिकाओं में मौजूद म्यूटेशंस की पहचान करती हैं। इससे ट्रीटमेंट को और प्रभावी बनाया जा सकता है और अनावश्यक साइड इफेक्ट्स कम होते हैं।”उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी व्यक्ति में बीआरसीए1/2 जैसे कैंसर-संबंधी जीन्स में बदलाव पाया जाता है तो मरीज और उनके परिवार के सदस्य भी अधिक जोखिम में हो सकते हैं। शुरुआती पहचान से प्रिवेंटिव जांच, लाइफस्टाइल में बदलाव और समय पर हस्तक्षेप संभव है।
डॉ. राजीव बेदी (डायरेक्टर, मेडिकल ऑन्कोलॉजी) ने कहा,“जीनोमिक्स की वजह से अब कैंसर थेरेपी ‘वन-साइज़-फिट्स-ऑल’ न होकर व्यक्ति-विशेष के अनुसार तय की जा रही है। मॉलीक्यूलर प्रोफाइलिंग और जीनोमिक एनालिसिस के आधार पर अब हर ट्यूमर को ड्राइव करने वाले म्यूटेशंस की पहचान की जा सकती है। इससे टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी का चयन आसान होता है और इलाज ज्यादा सफल होता है।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहल
इस संस्थान के जरिए फोर्टिस मोहाली ने भारत में कैंसर केयर को वैश्विक मानकों के करीब ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक कैंसर की रोकथाम और उपचार में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।