सोनीपत | हरियाणा के सोनीपत जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ किसी भी प्रकार का शारीरिक या मानसिक दंड अब पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में छात्रों को अपमानित, डांटा या प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।
आदेश में यह भी बताया गया कि इस प्रकार की प्रवृत्तियाँ छात्रों के मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा डालती हैं और विद्यालय की छवि को भी नुकसान पहुँचाती हैं।
कानूनी आधार
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009/2011 और बाल न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत, विद्यार्थियों को शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना देना दंडनीय अपराध है। इसलिए सभी शिक्षक और स्टाफ से अपेक्षा की गई है कि वे विद्यार्थियों के साथ सम्मानजनक, गरिमापूर्ण और सहयोगात्मक व्यवहार करें।
शिकायतों के चलते सख्ती
पूर्व में कई स्कूलों से यह शिकायतें मिली थीं कि विद्यार्थियों को उठक-बैठक करवाई जाती, कक्षा में अपमानित किया जाता, परिवारों पर नकारात्मक टिप्पणियाँ की जाती और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ता है। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए अब कड़ी निगरानी और सख्ती बरती जाएगी।
डीईओ के निर्देश
- विद्यार्थियों के साथ अनुचित व्यवहार करने वाले शिक्षकों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
- विद्यार्थियों के बीच सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए नियमित गतिविधियाँ और काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएँ।
- अभिभावकों के साथ सतत संवाद बनाए रखा जाएगा और किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होगी।
- विद्यार्थियों को स्वच्छता अभियान, पौधारोपण, खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- अनुशासन बनाए रखने के लिए कठोर दंड की बजाय समझाइश, काउंसलिंग और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से सकारात्मक उपाय अपनाए जाएँ।
सुरक्षित और आत्मविश्वासी स्कूल का माहौल
डीईओ नवीन गुलिया ने कहा, “विद्यार्थियों को डांटना या दंडित करना शिक्षा का हिस्सा नहीं है। हमारा लक्ष्य है कि हर बच्चा सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगी वातावरण में पढ़े। स्कूलों को ऐसा माहौल देना चाहिए जो बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करे, भय नहीं। किसी भी शिकायत पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”