16 October, 2025
बॉलीवुड के अनुभवी अभिनेता परेश रावल एक बार फिर कोर्टरूम ड्रामा में नजर आने वाले हैं। उनकी नई फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ का ट्रेलर गुरुवार को रिलीज़ किया गया, जो ताजमहल के पीछे की अनसुनी और विवादित कहानी को सामने लाता है। फिल्म इतिहास के तथ्यों और धार्मिक विश्वासों के बीच के टकराव को दर्शाती है।
इस फिल्म का निर्देशन तुषार अमरीश गोयल ने किया है और यह 31 अक्टूबर 2025 से सिनेमाघरों में देखने को मिलेगी। ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे परेश रावल एक साधारण टूर गाइड विष्णु दास के किरदार में हैं, जो पर्यटकों को ताजमहल की खूबसूरती के बारे में बताते हुए एक बड़ा सवाल उठाते हैं – ‘क्या यह वही कहानी है जो हमें पढ़ाई जाती है?’
विष्णु दास की भूमिका इतनी प्रभावशाली है कि वह ताजमहल के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर कर देता है। जज (जाकिर हुसैन) और वकील (नमित दास) के बीच कोर्टरूम में बहस छिड़ती है। ट्रेलर में पुराने दस्तावेजों और वैकल्पिक दृष्टिकोण के जरिए दर्शकों को ‘इंटेलेक्चुअल टेररिज्म’ की झलक मिलती है। अमृता खानविलकर और स्नेहा वाघ भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आते हैं, जो कहानी को और गहराई देते हैं।
परेश रावल का नया अवतार
फिल्म में परेश रावल का यह किरदार उनके पुराने कोर्ट ड्रामों जैसे ‘ओएमजी’ या ‘हेरा फेरी’ सीरीज से बिल्कुल अलग है। वह एक साधारण गाइड से एक साहसी विद्रोही में बदलते हैं। उनके संवाद, ‘ताजमहल दुनिया का सबसे बड़ा स्मारक है, लेकिन क्या इसकी सच्चाई दबाई जा रही है?’, दर्शकों में सवाल पैदा करते हैं। ड्रामेटिक बैकग्राउंड म्यूजिक और भव्य सिनेमेटोग्राफी इसे हाई-वोल्टेज थ्रिलर बनाते हैं।
हालांकि, फिल्म का मोशन पोस्टर, जिसमें ताज के गुंबद से शिवलिंग निकलता दिखाया गया था, सोशल मीडिया पर विवाद का कारण बन गया।
फिल्म का उद्देश्य
निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि ‘द ताज स्टोरी’ किसी धार्मिक मुद्दे पर आधारित नहीं है। यह ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित एक सामाजिक ड्रामा है, जो इतिहास, आस्था और स्वतंत्रता के सवाल उठाती है। परेश रावल ने कहा, ‘विष्णु दास का सफर सच्चाई की खोज का है। यह फिल्म दर्शकों को इतिहास को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती है।’ प्रोडक्शन हाउस ने भी जोर देकर कहा कि फिल्म किसी धार्मिक स्थल का दावा नहीं करती, बल्कि बौद्धिक दमन पर ध्यान केंद्रित करती है।