नई दिल्ली | पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 19 अक्टूबर के बीच कुल 308 मामले सामने आए हैं। इनमें तरनतारन और अमृतसर जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। इस दौरान 147 एफआईआर दर्ज की गई और 6.5 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया।
मुख्य प्रभावित जिले:
तरनतारन में अब तक 113 मामले सामने आए हैं, जबकि अमृतसर में 104 मामले दर्ज किए गए। अन्य जिलों में फिरोजपुर में 16, पटियाला में 15 और गुरदासपुर में सात मामले सामने आए। अधिकांश किसान रबी की फसल की बुवाई के लिए खेत साफ करने हेतु पराली जलाते हैं। इस वजह से पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
जुर्माना और एफआईआर:
PPCB के आंकड़ों के अनुसार, 132 मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 6.5 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 4.70 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है। कुल 147 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें तरनतारन में 61 और अमृतसर में 37 एफआईआर शामिल हैं। ये मामले भारतीय दंड संहिता की धारा 223 के तहत दर्ज किए गए हैं।
पराली जलाने में कमी:
पंजाब में 2024 में पराली जलाने की घटनाएं 10,909 रहीं, जबकि 2023 में यह संख्या 36,663 थी, यानी पिछले सालों की तुलना में 70% कमी आई है।
सरकारी प्रयास:
एसएसपी आदित्य और डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने कटाई के बाद पराली जलाने से रोकने के लिए सोहल गांव का दौरा किया। यहां किसानों से बातचीत कर समय प्रबंधन और फसल अवशेष न जलाने के उपाय सुझाए गए। गुरदासपुर पुलिस और पंजाब प्रोटेक्शन फोर्स ने भी नियमों के पालन और आग की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए बैठकें और उपाय किए।
राज्य सरकार और PPCB के प्रयासों के बावजूद, कई किसान अब भी फसल अवशेष हटाने के लिए पराली जलाना जारी रख रहे हैं।