27 October, 2025
कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली प्रबोधिनी एकादशी (जिसे देवोत्थान या देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है) इस वर्ष 2 नवंबर 2025, रविवार को मनाई जाएगी। यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं।
इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है, जिसमें भगवान विष्णु क्षीरसागर में विश्राम करते हैं। देवोत्थान एकादशी के साथ ही विवाह, मांगलिक और शुभ कार्यों की शुरुआत का समय भी शुरू हो जाता है। इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी परंपरागत रूप से किया जाता है, जो देव और मानव के मिलन का प्रतीक माना जाता है।भक्त इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु को जगाने के लिए शंख, घंटा, वाद्य यंत्रों और भजनों के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। कई स्थानों पर विशेष जागरण और कथा पाठ का आयोजन भी किया जाता है।धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ब्रह्माजी ने नारद ऋषि को इस व्रत का महात्म्य बताया था। कहा गया है कि—जिसके हृदय में प्रबोधिनी एकादशी का व्रत करने की भावना उत्पन्न होती है, उसके सौ जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, और जो इसे विधिपूर्वक करता है, उसके अनंत जन्मों के पाप भी भस्म हो जाते हैं।यह एकादशी न केवल भगवान विष्णु के जागरण का प्रतीक है, बल्कि मनुष्य के भीतर स्थित दिव्यता और सजगता को जगाने का संदेश भी देती है। इसलिए इसे ‘अपने भीतर के देवत्व को जगाने का पर्व’ कहा गया है।