शिमला | हिमाचल प्रदेश राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकॉस्ट) और भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में शिमला में आर्द्रभूमि (वेटलैंड) संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला में उत्तर भारत के राज्यों – जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यशाला का उद्देश्य वेटलैंड्स के संरक्षण, प्रबंधन और उनके विवेकपूर्ण उपयोग के लिए अनुभव साझा करना और नई रणनीतियों पर मंथन करना है। कल प्रतिभागी रेणुका झील का दौरा करेंगे ताकि वेटलैंड संरक्षण से जुड़ी जमीनी चुनौतियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया जा सके।
हिमाचल में फिलहाल 197 वेटलैंड्स हैं, जिनमें तीन अंतर्राष्ट्रीय और दो राष्ट्रीय स्तर के वेटलैंड्स शामिल हैं। हिमकॉस्ट के संयुक्त सदस्य सचिव सुरेश कुमार अत्री ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य देशभर में वेटलैंड प्रबंधन के नवीन दृष्टिकोणों और अनुभवों का आदान-प्रदान करना है।
अत्री ने बताया कि खजियार झील में लगातार बढ़ती गाद की समस्या से झील का अस्तित्व खतरे में है, वहीं रिवाल्सर झील के आसपास का शहरीकरण बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के वेटलैंड्स से कृषि, बागवानी, पर्यटन और मत्स्य पालन जैसे प्रमुख क्षेत्र गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए उनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।