चंडीगढ़ | हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मानेसर लैंड स्कैम मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने हुड्डा की याचिका को खारिज कर दिया, जिसके बाद अब सीबीआई की पंचकूला स्थित विशेष अदालत में उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सीबीआई पहले ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद विशेष अदालत हुड्डा और अन्य आरोपियों पर आरोप तय कर ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री समेत 34 आरोपियों को जिम्मेदार ठहराया है।
क्या है मामला
सीबीआई के मुताबिक, भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुख्यमंत्री रहते हुए 25 अगस्त 2005 को मानेसर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) की अधिसूचना रद्द करवाई थी और सेक्शन-6 का नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद किसानों की जमीन का अधिग्रहण रोक दिया गया और बिल्डरों ने 400 एकड़ भूमि औने-पौने दामों में खरीदी।
साल 2007 में हुड्डा सरकार ने अधिग्रहण से जमीन को मुक्त घोषित कर दिया, जिससे किसानों को करीब ₹1500 करोड़ का नुकसान हुआ। सीबीआई ने 2015 में जांच शुरू की और 2018 में हुड्डा समेत 34 लोगों के खिलाफ 80 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस केस में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। शीर्ष अदालत ने माना कि 2007 में तत्कालीन हुड्डा सरकार का निर्णय दुर्भावनापूर्ण और धोखाधड़ीपूर्ण था। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि बिचौलियों द्वारा अर्जित अनुचित लाभ की वसूली की जाए और राज्य सरकार को “एक-एक पाई वापस लेने” का आदेश दिया गया था।