Hamirpur, Arvind
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा केवल सरकारी स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों को ही लैपटॉप देने के निर्णय का निजी स्कूलों ने कड़ा विरोध किया है।हिमाचल प्रदेश स्कूल मैनेजमेंट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इसे भेदभावपूर्ण और अनुचित करार देते हुए कहा कि सभी मेधावी विद्यार्थियों को, चाहे वे सरकारी या निजी संस्थान से हों, समान रूप से सम्मान और अवसर मिलना चाहिए।
हमीरपुर के हमीर होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगजीत सिंह ठाकुर ने कहा कि मेधावी छात्र किसी संस्था विशेष के नहीं होते, बल्कि वे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की सफलता का प्रतीक हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से अपील की कि इस निर्णय पर पुनर्विचार कर निजी स्कूलों के मेधावी छात्रों को भी इस योजना में शामिल किया जाए।
निजी स्कूलों ने सरकार से की पुनर्विचार की मांग
संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश के मेधावी छात्र पिछले तीन वर्षों से इस पुरस्कार की प्रतीक्षा कर रहे थे। वर्ष 2022 के बाद से अब तक किसी भी छात्र को लैपटॉप नहीं मिला है। साथ ही, सरकार द्वारा यह घोषणा करना कि तीन वर्षों में अव्वल आने वाले छात्रों को केवल एक ही इनाम दिया जाएगा, छात्रों के साथ सरासर अन्याय है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में लगभग 75 प्रतिशत छात्र निजी स्कूलों से हैं, इसलिए इस योजना से उन्हें बाहर रखना असमानता को दर्शाता है।संघ का मानना है कि यह निर्णय बिना उचित जानकारी के लिया गया है और मुख्यमंत्री तथा शिक्षा मंत्री को इसकी पूरी जानकारी नहीं दी गई होगी। संघ जल्द ही मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर इस मामले पर चर्चा करेगा ताकि प्रत्येक मेधावी छात्र को उसका अधिकार मिल सके।प्रेस वार्ता में राजेश सिंह ठाकुर, अमित ठाकुर, अनिल ठाकुर, निष्पक्ष भारती, देवराज वर्मा, गौतम शर्मा, पंकज लखनपाल, कुलदीप धीमान, ललित मोहन, प्रताप वर्मा और संजय कुमार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।