Bilaspur, Subhash-:उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयनादेवी मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन हवनकुंड अब आधुनिक और आकर्षक रूप में दिखाई देगा। मंदिर न्यास प्रशासन ने हवनकुंड के संरक्षण, मजबूती और सौंदर्यीकरण के लिए विस्तृत योजना तैयार कर कार्य आरंभ कर दिया है। अनुमानित 1500 से 1800 वर्ष पुराने इस पवित्र हवनकुंड को संरक्षित रखना सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस जीर्णोद्धार कार्य के लिए 4.50 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। कार्य को पूरी तरह पारंपरिक शैली में संपन्न करने का जिम्मा देश की प्रतिष्ठित संस्था इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हैरिटेज (इंटेक) को सौंपा गया है। इंटेक के विशेषज्ञों ने मंदिर परिसर का विस्तृत सर्वेक्षण करने के बाद डीपीआर तैयार कर प्रशासन को सौंपी, जिसके अनुमोदन के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ।
सबसे खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में न सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है और न किसी केमिकल का। इसकी जगह प्राचीन निर्माण पद्धतियों को अपनाते हुए चूना, माह दाल की पीठी, मैथी, बिल गिरी का चूरा और अन्य जैविक सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पारंपरिक मिश्रणों से हवनकुंड अधिक मजबूत, टिकाऊ और प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रहेगा। अनुमान है कि नए स्वरूप में तैयार होने के बाद यह संरचना कम से कम अगले 50 वर्षों तक बिना किसी जोखिम के स्थिर बनी रहेगी।
मंदिर न्यास अधिकारी धर्मपाल चौधरी के अनुसार हवनकुंड का कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि हवनकुंड न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका ऐतिहासिक मूल्य भी अत्यधिक है, इसलिए इसे सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है।स्थानीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों में भी हवनकुंड के नए स्वरूप को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। उम्मीद है कि कार्य पूरा होने के बाद यह ऐतिहासिक धरोहर और अधिक आकर्षक व दर्शनीय रूप में सामने आएगी।