चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) की सीधी भर्ती को तत्काल रोकने और संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (ACP) लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र भेजकर मामले में शीघ्र हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। एसोसिएशन ने रविवार को अहम बैठक बुलाई है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद करने पर फैसला लिया जा सकता है।
OPD बंद कर चुके डॉक्टर अब कड़े कदम उठाने के मूड में
सरकारी डॉक्टर गुरुवार को सुबह 9 से 11 बजे तक दो घंटे OPD सेवाएं बंद कर चुके हैं। डॉक्टरों ने संकेत दिए हैं कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो सभी स्वास्थ्य सेवाएं—जिसमें आपातकालीन और पोस्टमार्टम सेवाएं भी शामिल हैं—पूरी तरह बंद की जा सकती हैं।
“सीधी भर्ती से पदोन्नति के अवसर खत्म” : एचसीएमएसए
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMASA) के अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया और महासचिव अनिल यादव द्वारा सीएम को भेजे गए पत्र में कहा गया है:
- एसएमओ की सीधी भर्ती मौजूदा डॉक्टरों की पदोन्नति के अवसरों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।
- वर्तमान स्थिति में 95% से अधिक सरकारी डॉक्टर अपनी पूरी सेवा अवधि में केवल एक पदोन्नति ही प्राप्त कर पाते हैं।
- कई डॉक्टर पदोन्नति की कमी के कारण स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने को मजबूर हुए हैं।
डॉक्टरों ने याद दिलाया कि 2021 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने एसएमओ की सीधी भर्ती रोकने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया।
संशोधित ACP एक साल से लंबित, अन्य भत्ते भी मंजूर नहीं
पत्र में यह भी उल्लेख है कि:
- संशोधित ACP को मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिले एक वर्ष हो चुका है, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।
- नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस (NPA), आयुष्मान इंसेंटिव और स्पेशलिस्ट इंसेंटिव जैसे विकल्पों पर भी सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया।
एसोसिएशन का कहना है कि लंबित मांगों के समाधान के बिना जनता को होने वाली किसी भी असुविधा के लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी।
एसएमओ के 200 पद खाली, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित
वर्तमान में कुल 644 एसएमओ पदों में से लगभग 200 पद रिक्त हैं। इनमें से:
- 160 पद सीधी भर्ती के लिए आरक्षित हैं
- सेवा नियमों में संशोधन न होने के कारण ये पद लंबे समय से खाली पड़े हैं
डॉक्टरों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और सिविल सर्जन कार्यालयों में एसएमओ तथा उप-सिविल सर्जन की कमी से राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए रिक्त पदों को पदोन्नति के माध्यम से तुरंत भरे जाने की मांग की गई है।