हिमाचल पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की कड़ी चेतावनी
Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 17 दिसंबर से पहले संयुक्त सलाहकार समिति (JCC) का गठन नहीं किया गया, तो पेंशनर्स अपने परिवारों के साथ सचिवालय का घेराव करेंगे और बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। आगामी दिनों में इस प्रदर्शन की तिथि भी समिति द्वारा घोषित की जाएगी।
आज आयोजित प्रेस वार्ता में समिति ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि दर्जनों बार आश्वासन मिलने के बावजूद एक भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। समिति के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने कहा कि कुछ स्वयंभू नेता सरकार को गुमराह कर रहे हैं और अपने निजी हितों के लिए पेंशनर्स की आवाज को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने आत्मा राम के नेतृत्व वाले दूसरे गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके साथ गिने-चुने लोग हैं जबकि अधिकांश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के साथ खड़े हैं।
सुरेश ठाकुर ने बताया कि धर्मशाला में विधानसभा घेराव के दौरान मुख्यमंत्री ने सत्र के बाद एक सप्ताह के भीतर वार्ता का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई बैठक नहीं बुलाई गई। उन्होंने कहा कि 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों की कॉम्यूटेशन, लीव एनकैशमेंट और ग्रेच्युटी की करोड़ों रुपये की देनदारियां लंबित हैं, जिन पर सरकार चुप्पी साधे बैठी है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ वित्तीय संकट का हवाला दे रही है जबकि दूसरी ओर आपदा के समय भी मंडी में भव्य रैली आयोजित कर रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
सुरेश ठाकुर ने कहा कि सरकार 13% लंबित महंगाई भत्ता (DA) तुरंत जारी करे और 4% की किस्त में से एक प्रतिशत की कटौती को वापस ले। साथ ही कॉर्पोरेट सेक्टर के उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन बहाल करने की मांग उठाई, जिन्हें 2004 के बाद यह लाभ नहीं दिया गया जबकि 1999 की अधिसूचना में इसकी व्यवस्था स्पष्ट थी।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने 17 दिसंबर तक JCC का गठन नहीं किया या वार्ता नहीं की, तो पेंशनर्स परिवार सहित सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना देंगे और बजट सत्र तक आंदोलन जारी रहेगा।