Hamirpur, Arvind-:मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार दोपहर अपने पैतृक गांव भंवडा पहुंचकर अपनी माता से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री की माता भावुक हो गईं और उन्होंने अपने बेटे को गले लगाया।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को समाप्त करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा की जगह जीरामजी योजना लागू की गई है, जो गरीबों के रोजगार के साथ खिलवाड़ है। पहले मनरेगा के तहत मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब इसमें 90 प्रतिशत केंद्र और 10 प्रतिशत राज्य सरकार को देना पड़ रहा है।मुख्यमंत्री ने नादौन विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान कहा कि मनरेगा समाप्त करने के विरोध में वे जनता के बीच जाएंगे और मनरेगा व जीरामजी योजना के अंतर को लोगों के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि मनरेगा से ग्रामीणों को रोजगार मिलता था, लेकिन अब इसमें कई शर्तें जोड़ दी गई हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री सुक्खू ने नादौन में वैकुंठ धाम और गूगा धाम का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पंचायतों में इस तरह के धाम बनाए जा रहे हैं ताकि लोगों को बैठने और विश्राम की बेहतर सुविधा मिल सके।
बीपीएल और आईआरडीपी को लेकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिवार का नाम सूची से नहीं काटा गया है। उन्होंने बताया कि सर्वे इसलिए कराया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सबसे अधिक जरूरतमंद परिवार कौन से हैं। यह सर्वे एसडीएम और बीडीओ के माध्यम से कराया जा रहा है। स्टेज-वन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना सरकार का उद्देश्य है।वहीं, शिमला में आयोजित एमएसएमई मीट के बाद भाजपा नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने जनमंच के नाम पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। उन्होंने आरोप लगाया कि जनमंच केवल अधिकारियों को कोसने और सरकारी धन की बर्बादी का माध्यम बनकर रह गया था।