Palwal, 25 January-हरियाणा के खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम के पलवल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव को चुनौती देने वाली हाई-प्रोफाइल याचिका में एक गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। यह खुलासा याचिका दायर करने वाले पूर्व मंत्री करन सिंह दलाल ने किया। उन्होंने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को लिखित शिकायत में बताया है कि उन्होंने याचिका में महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत यानी पेन ड्राइव दाखिल की थी, जिसमें चुनावी मामले से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड, वीडियो, तस्वीरें और स्क्रीनशॉट सुरक्षित थे।
करन सिंह दलाल के अनुसार, यह पेन ड्राइव एनेक्सचर पी-4 के रूप में अदालत में जमा कराई गई थी। हालांकि, 21 जनवरी 2026 को उन्हें चुनाव शाखा की ओर से सूचना मिली कि अदालत की फाइल से यह पेन ड्राइव गायब है। उनके वकील को दोपहर 12.06 बजे बताया गया कि फाइल के कागजी बंडल के पृष्ठ संख्या 72 पर लगी प्लास्टिक पाउच से पेन ड्राइव हटा दी गई है।शिकायत में उल्लेख किया गया कि पेन ड्राइव का सीरियल नंबर बीएम 2409003429 था। इसमें राज्य मंत्री गौरव गौतम पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण के आरोपों के सबूत मौजूद थे। हाईकोर्ट के 28 नवंबर 2025 के आदेश में भी इन वीडियो और डिजिटल सबूतों का उल्लेख किया गया था, जिससे स्पष्ट होता है कि यह सामग्री मामले की रीढ़ है।करन सिंह दलाल ने पेन ड्राइव के गायब होने को जानबूझकर किसी साजिश के तहत हटाए जाने की आशंका जताई है, जिससे प्रतिवादी को अनुचित लाभ मिल सके और याचिकाकर्ता के मामले को कमजोर किया जा सके। उन्होंने रजिस्ट्रार से मामले की गहन जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले में पैरवी करने वाले हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल और भारत सरकार के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मोहन जैन ने कहा कि अदालत की फाइल से प्राथमिक इलेक्ट्रॉनिक सबूत का गायब होना बेहद गंभीर मामला है। यह न्याय की निष्पक्षता और अदालत के रिकॉर्ड की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक सबूत आधुनिक न्याय व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं और इनके साथ छेड़छाड़ पूरी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। गौरतलब है कि जस्टिस अर्चना पुरी ने 28 नवंबर 2025 को याचिका पर आदेश देते हुए कहा था कि याचिका में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया विचारणीय हैं और इन पर निर्णय साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
इस घटना ने न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की सुरक्षा और चुनावी मामलों में पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। करन सिंह दलाल की शिकायत के बाद हाईकोर्ट प्रशासन की निगरानी में इस मामले की जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और न्याय प्रक्रिया पर विश्वास कायम रहे।