Hamirpur, Arvind-:हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला में यूजीसी बिल को लेकर सियासी और सामाजिक माहौल गरमा गया है। राजपूत महासभा और सवर्ण समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने रैली निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शहर में मार्च करते हुए जमकर नारेबाजी की और सरकार से यूजीसी बिल को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई।
राजपूत महासभा हमीरपुर और सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त हमीरपुर के माध्यम से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी यूजीसी बिल सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ है और इससे समाज में जातिगत विभाजन और गहराने की आशंका है।राजपूत महासभा हमीरपुर के महासचिव जोगिंदर सिंह ने कहा कि यूजीसी बिल की अधिसूचना जारी कर केंद्र सरकार ने सामान्य वर्ग के लोगों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की राजनीति कर रही है
जोगिंदर सिंह ने कहा कि वर्ष 1990 में मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू होने से हजारों सामान्य वर्ग के युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ था और अब एक बार फिर वैसी ही स्थिति पैदा की जा रही है।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने समय रहते यूजीसी बिल को वापस नहीं लिया तो सवर्ण समाज आगामी चुनावों में नेताओं को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगा। उनका कहना था कि समाज अब अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार है और किसी भी कीमत पर अन्याय को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वहीं, इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हमीरपुर व्यापार मंडल के प्रधान सुमित ठाकुर ने भी यूजीसी बिल का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह बिल समाज में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देगा और सवर्ण समाज के साथ खुला धोखा है। सुमित ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार ने इस बिल को वापस नहीं लिया तो आने वाले समय में एक व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह केंद्र सरकार की होगी।
प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में मांग की कि सरकार जनता को जाति के आधार पर बांटने की नीति छोड़कर समानता और न्याय के सिद्धांतों पर काम करे। फिलहाल यूजीसी बिल को लेकर सवर्ण समाज में रोष बना हुआ है और आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।