शिमला, समर न्यूज़ ब्यूरो-:हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने की संभावना के कारण चालू वित्त वर्ष से ही वार्षिक खर्च में कमी आ सकती है। इस विषय पर अंतिम निर्णय छह और सात फरवरी से होने वाली विधायक प्राथमिकता बैठकों में लिया जाएगा। इस कटौती का सीधा असर अगले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के आकार पर पड़ सकता है।
राज्य सरकार का अनुमान है कि केवल राजस्व घाटा नियंत्रण में आने पर ही वित्तीय संतुलन बनाए रखा जा सकेगा। हालांकि, इसका नकारात्मक असर विकास योजनाओं पर दिखने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश के बजट का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, ऋण और ब्याज की अदायगी में खर्च होता है। कुल राजस्व प्राप्तियों के अनुपात में यह व्यय बढ़ने से विकास पर खर्च करने के लिए उपलब्ध धन और भी सीमित हो जाएगा।विशेषज्ञों का मानना है कि आरडीजी में कटौती से विकास के लिए बजट का हिस्सा कम होना राज्य की नई परियोजनाओं और योजनाओं पर दबाव डाल सकता है। वहीं, सरकार का तर्क है कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, ताकि लंबी अवधि में राज्य का राजस्व घाटा नियंत्रण में रहे।इस वित्तीय चुनौतियों के बीच आगामी विधायक बैठकें यह तय करेंगी कि बजट और विकास योजनाओं के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए और राज्य की आर्थिक प्राथमिकताओं को किस तरह प्राथमिकता दी जाए।