चंडीगढ़। हरियाणा में बुजुर्गों की पेंशन कटने और खेल नर्सरियों में खिलाड़ियों को खुराक भत्ता नहीं मिलने के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (आप) ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि राज्य की खेल नर्सरियों में करीब 37 हजार खिलाड़ी बिना डाइट के अभ्यास करने को मजबूर हैं, जबकि 75 हजार बुजुर्गों की पेंशन गलत तरीके से बंद कर दी गई है।
शनिवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में अनुराग ढांडा ने कहा कि ओलिंपिक, राष्ट्रमंडल और एशियन गेम्स में देश का नाम रोशन करने वाले अधिकतर खिलाड़ी हरियाणा की मिट्टी से निकले हैं। आज वही खिलाड़ी सवाल कर रहे हैं कि क्या उनकी मेहनत और मेडल की कीमत सिर्फ चुनावी मंचों तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ‘आगे दौड़ पीछे छोड़’ की नीति पर चल रही है और पिछले 10 महीनों से खिलाड़ियों की डाइट का पैसा जारी नहीं किया गया है।
ढांडा ने आरोप लगाया कि खेल नर्सरियों में प्रशिक्षण देने वाले कोच और प्रशिक्षकों को भी 10 महीने से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में खिलाड़ी दुविधा में हैं कि वे अपने खाने-पीने का इंतजाम करें या खेल की तैयारी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नर्सरियों को साल में दो महीने बंद करने का फैसला किस तर्क पर लिया गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बिना निरंतर अभ्यास के मेडल की तैयारी नहीं कर सकते।
बुजुर्गों की पेंशन के मुद्दे पर ढांडा ने कहा कि सरकार किसानों द्वारा फसल बेचने से मिली राशि को आय मानकर उन्हें संपन्न बता रही है, जबकि इसमें खेती की लागत भी शामिल होती है। कई मामलों में परिवार पहचान पत्र में नाम, सरनेम और उम्र में मामूली गड़बड़ी के आधार पर पेंशन काट दी गई है। कहीं पूरे परिवार की आय जोड़कर बुजुर्गों की पेंशन बंद की जा रही है, जबकि बुजुर्ग की व्यक्तिगत आय का परिवार की कुल आय से कोई सीधा संबंध नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों और पोर्टल की गलतियों का खामियाजा बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह से मांग की कि खिलाड़ियों की डाइट के लिए लंबित करीब 10 करोड़ रुपये तुरंत जारी किए जाएं और किसानों की फसल बिक्री को आय मानना बंद कर सभी पात्र बुजुर्गों की बुढ़ापा पेंशन जल्द बहाल की जाए।