सोनीपत । कभी हरियाणा की राजनीति में “किंगमेकर” की भूमिका निभाने वाली जननायक जनता पार्टी अब अपने अस्तित्व को बचाने की जंग लड़ती नजर आ रही है। सोनीपत में आयोजित ‘युवा योद्धा जिला सम्मेलन’ में पहुंचे जेजेपी नेता दिग्विजय चौटाला के तेवर इस बार बदले हुए दिखे। मंच से उन्होंने स्वीकार किया कि भाजपा के साथ गठबंधन करना पार्टी की सबसे बड़ी राजनीतिक गलती साबित हुआ।
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि साल 2018 में इनेलो से अलग होकर बनी जेजेपी ने 2019 के विधानसभा चुनाव में 10 सीटें जीतकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे, लेकिन भाजपा के साथ सत्ता में साझेदारी करना जनता को रास नहीं आया। उन्होंने माना कि गठबंधन के फैसले ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया और इस बार चुनाव में पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका।
उन्होंने नायब सैनी सरकार पर भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज हरियाणा में कानून-व्यवस्था की हालत बिगड़ चुकी है। चौटाला ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पुलिस का डर खत्म हो चुका है और बदमाशों के हौसले बुलंद हैं।
बुढ़ापा पेंशन कटौती को लेकर उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर कटौती करनी है तो बुजुर्गों की पेंशन नहीं, बल्कि विधायकों और सांसदों की सुविधाओं व कमाई पर कैंची चलानी चाहिए।
भ्रष्टाचार को लेकर दिग्विजय चौटाला ने कहा कि आबकारी विभाग मुख्यमंत्री के अधीन है और वहां खुलेआम लूट मची हुई है। उन्होंने सरकारी नौकरियों में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।
आगामी निकाय चुनावों पर बोलते हुए उन्होंने संकेत दिए कि पार्टी चुनाव चिन्ह पर लड़ने को लेकर अभी मंथन कर रही है। दिग्विजय चौटाला का भाजपा गठबंधन को लेकर किया गया यह सार्वजनिक कबूलनामा आने वाले दिनों में हरियाणा की राजनीति में नई बहस और हलचल पैदा कर सकता है।