शिमला, संजू-:शिमला में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने के मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने सभी राजनीतिक दलों की अहम बैठक बुलाई। बैठक में कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी, बसपा और माकपा के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हालांकि लंबी चर्चा के बावजूद कोई सर्वसम्मति नहीं बन सकी। बैठक के बीच ही बीजेपी विधायकों ने वॉकआउट कर दिया और राज्य सरकार पर केंद्र को बेवजह दोषी ठहराने का आरोप लगाया।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और हिमाचल बीजेपी अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी वित्तीय नाकामी छिपाने के लिए केंद्र और बीजेपी पर आरोप मढ़ रही है। उनका कहना था कि आरडीजी का मुद्दा राजनीतिक लाभ के लिए उठाया जा रहा है, जबकि प्रदेश की आर्थिक स्थिति के लिए राज्य सरकार खुद जिम्मेदार है।वहीं मुख्यमंत्री सुक्खू ने पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी आरडीजी पर ठोस चर्चा से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में मिले 54,296 करोड़ रुपये के राजस्व घाटा अनुदान और 16,000 करोड़ रुपये की जीएसटी क्षतिपूर्ति का उपयोग विकास के बजाय फिजूलखर्ची और राजनीतिक लाभ के लिए किया। मुख्यमंत्री के अनुसार यह राशि राज्य की कुल आय का 25 से 30 प्रतिशत तक थी।
सुक्खू ने कहा कि मौजूदा कांग्रेस सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये की आरडीजी प्राप्त हुई है, जो पूर्व सरकार को मिली राशि से लगभग आधी है। उन्होंने इसे प्रदेश के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि सभी दलों को राजनीतिक मतभेद भुलाकर राज्यहित में एकजुट होना चाहिए।बैठक में माकपा नेता राकेश सिंघा ने भी आर्थिक स्थिति पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता बताई, लेकिन स्पष्ट है कि फिलहाल आरडीजी मुद्दे पर सियासी टकराव जारी रहेगा।