शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और लोअर हिमाचल के बीच यातायात को सुगम बनाने के लिए प्रस्तावित शिमला-शालाघाट फोरलेन की अलाइनमेंट अब नए सिरे से तय की जाएगी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस परियोजना के लिए फिर से सर्वेक्षण और नई डीपीआर तैयार करने का निर्णय लिया है। इसके लिए मार्च से सर्वे शुरू होने की तैयारी की जा रही है।
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार नए सर्वे के बाद करीब चार साल पहले तैयार की गई अलाइनमेंट में बदलाव होना तय है। इस बार फोरलेन परियोजना के अनुरूप नई डीपीआर बनाई जाएगी और टेंडर प्रक्रिया पूरी कर साल के अंत तक निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। फोरलेन बनने से शिमला और लोअर हिमाचल के बीच सफर अधिक आसान और तेज हो जाएगा।
यह परियोजना शिमला-मटौर फोरलेन के तहत प्रस्तावित है, जिसके अंतर्गत शालाघाट से शिमला तक करीब 27 किलोमीटर लंबे हिस्से को फोरलेन में विकसित किया जाना है। एनएचएआई ने वर्ष 2022 में भी इस मार्ग का सर्वे कर अलाइनमेंट तैयार की थी, लेकिन तब इसे टू लेन योजना के आधार पर तैयार किया गया था और डीपीआर को अंतिम रूप नहीं दिया गया था।
जाठियादेवी समेत ग्रामीण क्षेत्रों से गुजर सकता है फोरलेन
एनएचएआई का कहना है कि नया फोरलेन शिमला ग्रामीण क्षेत्र के कई गांवों के साथ-साथ जाठियादेवी से होकर भी गुजर सकता है। जाठियादेवी क्षेत्र में सरकार शिमला का नया शहर बसाने की योजना पर काम कर रही है। ऐसे में इस क्षेत्र को फोरलेन से जोड़ने की संभावना भी बढ़ गई है। शिमला ग्रामीण के विधायक एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी जनसभाओं में क्षेत्र को फोरलेन से जोड़ने के संकेत दे चुके हैं। हालांकि अंतिम स्थिति सर्वे रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
एनएचएआई ने यह भी भरोसा दिलाया है कि नई अलाइनमेंट तय करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे और प्रभावित परिवारों की संख्या कम रहे।
ढली-कैथलीघाट से जुड़ेगा फोरलेन, टोल बैरियर भी प्रस्तावित
शिमला-शालाघाट फोरलेन को तारादेवी से शोघी के आसपास कालका-शिमला फोरलेन के ढली-कैथलीघाट हिस्से से जोड़ने की योजना है। इसके अलावा शिमला से नौणी के बीच इस मार्ग पर टोल बैरियर स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
पहले किए गए सर्वे में शिमला के 51 और सोलन के चार गांव सड़क परियोजना की जद में आ रहे थे। अब नए सर्वे के बाद कितने गांव प्रभावित होंगे, इसका खुलासा सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।
मार्च से सर्वे शुरू, जल्द बनेगी नई डीपीआर
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी कर्नल अजय सिंह बरगोती ने बताया कि शिमला-शालाघाट फोरलेन की नई अलाइनमेंट और डीपीआर जल्द तैयार की जाएगी। इसके लिए मार्च से सर्वे शुरू करने की तैयारी है और कंसलटेंट की नियुक्ति को लेकर टेंडर प्रक्रिया भी आरंभ कर दी गई है।
चंडीगढ़ और लोअर हिमाचल से शिमला का सफर होगा आसान
फोरलेन परियोजनाओं के पूरा होने से राजधानी शिमला की चंडीगढ़ और लोअर हिमाचल से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। शिमला-परवाणू फोरलेन को अगले साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। परवाणू से कैथलीघाट तक अधिकांश काम पूरा हो चुका है, जबकि कैथलीघाट से ढली तक 27 किलोमीटर हिस्से पर कार्य जारी है और लगभग 50 फीसदी निर्माण पूरा होने का दावा किया गया है।
एनएचएआई के अनुसार वर्ष 2027 के अंत तक इस फोरलेन को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद कैथलीघाट से ढली तक का सफर करीब 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगा। सबसे अहम बात यह होगी कि लोगों को शिमला शहर में प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा, जिससे शहर में ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
सेब बागवानों को भी मिलेगा बड़ा लाभ
फोरलेन बनने से सेब बागवानों को भी राहत मिलेगी। बागवानों का कहना है कि सड़क बेहतर होने से जाम कम होगा और सेब जल्दी व सुरक्षित तरीके से चंडीगढ़ और दिल्ली की मंडियों तक पहुंच सकेगा। अभी खराब सड़कों और झटकों के कारण कई बार सेब खराब हो जाता है, लेकिन फोरलेन बनने के बाद इस नुकसान में कमी आने की संभावना है।