बालीचौकी (मंडी)। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में देवी-देवताओं की परंपरा और मर्यादा को बनाए रखने के लिए अब देवता कमेटियों ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मंडी जिले की सराज घाटी में अधिष्ठाता बड़ा देव विष्णु मतलोड़ा के बाद अब देव चुंजवाला महादेव की सात हार कमेटी ने अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव से पहले ही अहम निर्णय लेते हुए सोशल मीडिया पर नियम लागू कर दिए हैं।
कमेटी ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी व्यक्ति देव चुंजवाला महादेव के देव खेल, गुप्त कार्यों और पारंपरिक गतिविधियों से संबंधित फोटो या वीडियो अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट नहीं कर सकेगा। इस फैसले को देव परंपरा की गरिमा और समाज की एकता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
फर्जी अकाउंट पर लगेगी रोक, एक हफ्ते में बंद करने के आदेश
सात हार कमेटी ने देवता के नाम पर सोशल मीडिया पर चल रहे सभी अनधिकृत और फर्जी अकाउंट एक सप्ताह के भीतर बंद करने के निर्देश जारी किए हैं। कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति इन आदेशों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ समाज और समिति स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दोषी पाए जाने पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
कमेटी ने यह भी निर्णय लिया है कि देवता से संबंधित कोई भी भ्रामक सूचना, अफवाह या गलत कैप्शन डालने पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देवता से जुड़ी सभी आधिकारिक पोस्ट और वीडियो केवल कमेटी के संरक्षण में संचालित आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से ही जारी किए जाएंगे।
देव परंपरा की मर्यादा बचाने के लिए उठाया कदम
कमेटी का कहना है कि आजकल लोग देव परंपराओं से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर देव संस्कृति का मजाक बना रहे हैं। कई जगह देव खेल के दौरान वीडियो बनाकर सार्वजनिक किया जा रहा है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं और परंपराओं की पवित्रता प्रभावित हो रही है। इसी कारण यह जरूरी हो गया है कि देव नीति और परंपरा को बनाए रखने के लिए सभी देवता कमेटियां कड़े फैसले लें।
कमेटी अध्यक्ष ने दी चेतावनी
देव चुंजवाला महादेव सात हार कमेटी के अध्यक्ष देवराज रावत ने बताया कि देवता से जुड़ी प्राचीन गतिविधियों, देव खेल और धार्मिक स्थलों की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर डालने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने कहा कि देवता के नाम से बने अनधिकृत अकाउंट तत्काल बंद किए जाएंगे और नियम तोड़ने वालों पर 20 हजार रुपये जुर्माने के साथ दंडात्मक कार्रवाई होगी।
कमेटी के इस फैसले की स्थानीय लोगों ने सराहना करते हुए इसे देव संस्कृति की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है।